आजकल हल्की-फुल्की बीमारी में भी एंटीबायोटिक दवाओं का तेजी से इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन यह आदत आगे चलकर गंभीर खतरा बन सकती है. जरूरत से अधिक एंटीबायोटिक लेने पर शरीर में मौजूद बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जिससे दवाएं बेअसर होने लगती हैं. यही स्थिति एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहलाती है, जो भविष्य में बड़ी बीमारियों के इलाज को भी मुश्किल बना सकती है.
एंटीबायोटिक कोर्स पूरा करना है जरूरी
जरूरत से अधिक एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करने से शरीर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट होने लगता है. यानी शरीर में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया इन दवाओं से खत्म होने के बजाय उन पर हावी होने लगते हैं. लगातार और अनियंत्रित उपयोग से धीरे-धीरे इन दवाइयों का असर कम हो जाता है. इसके अलावा कई बार लोग डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक शुरू तो कर देते हैं, लेकिन पूरा कोर्स किए बिना ही बीच में दवा छोड़ देते हैं. ऐसा करने से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया और अधिक मजबूत हो जाते हैं, जिससे भविष्य में संक्रमण का इलाज और भी मुश्किल हो सकता है.
बढ़ जाता है गंभीर बीमारियों का खतरा
जरूरत से अधिक एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से शरीर में होने वाली छोटी-छोटी बीमारियों को ठीक होने में पहले से अधिक समय लगने लगता है. दवाओं का असर कम होने से गंभीर बीमारियों के इलाज में भी जोखिम बढ़ जाता है. असर घटने के कारण निमोनिया और यूरिन इन्फेक्शन जैसी बीमारियों से हर साल हजारों लोग जान गंवा देते हैं. इस विषय पर लोकल18 से बातचीत करते हुए आजमगढ़ के चिकित्सा अधीक्षक सतीश चंद्र कनौजिया ने बताया कि बिना डॉक्टर की परामर्श के एंटीबायोटिक का सेवन शरीर में कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है. इन दवाओं के कई साइड इफेक्ट्स भी होते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में डॉक्टरों की सलाह है कि किसी भी परिस्थिति में बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक का सेवन न करें.
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पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें
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