शरीर पर क्या असर डालती है यह दवा
पहले यह जानिए कि यह दवा होती क्या है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक जब किसी को बहुत कम बीपी यानी लो बीपी की बीमारी होती है तो बहुत आपात परिस्थितियों में इस इंजेक्शन को दिया जाता है. जब बहुत ज्यादा बीपी कम हो गया हो या लो बीपी वाले को कोई ऑपरेशन कराना हो तब डॉक्टर इस इंजेक्शन को देता है. इस दवा में मेफेंटर्मिन सल्फेट मौजूद होता है. डॉक्टर बताते हैं कि यह दवा शरीर में नॉरएपिनेफ्रिन (norepinephrine) नामक स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाती है. यह हार्मोन दिमाग और दिल को तेजी से काम करने के लिए उत्तेजित करता है. इसके कारण कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन और हार्ट द्वारा पंप किए जाने वाले खून की मात्रा बढ़ जाती है. इससे व्यक्ति को महसूस होता है कि उसे बहुत ज्यादा ताकत और स्टेमिना मिल गई है लेकिन दिमाग कुछ समय के लिए ऐसा झूठा दिलासा दिलाता है. यह इस दवा के गलत इस्तेमाल को भड़काता है. जिस व्यक्ति को यह परेशानी हुई, उसने बताया कि मैं 20 साल से कुश्ती कर रहा हूं. आसपास के लोग कहते थे कि यह पावर बूस्टर है, इससे स्टेमिना, सतर्कता और आक्रामकता बढ़ती है. मेडिकल स्टोर पर जाकर कहो कि बेहतर प्रदर्शन करना है, तो वे यही दवा दे देते हैं.
कैसे ठीक हुआ मरीज
सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी कई जांचों के बाद डॉक्टरों को समझ आया कि लंबे समय तक उत्तेजक दवाओं के गलत इस्तेमाल से दिल पर लगातार दबाव पड़ा, जिससे खून का थक्का बनने की आशंका बढ़ी और दिल की पंप करने की ताकत कमजोर हो गई. एम्स दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. सौरभ अगस्टम के अनुसार, पहलवान की ईकोकार्डियोग्राफी में पता चला कि उसके दिल की मांसपेशियां कमजोर हो गई हैं और उसके पैर में बड़ा खून का थक्का बना हुआ है. डॉ. अगस्टम बताते हैं कि दिल के बाएं हिस्से में बना थक्का धमनियों के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों, जैसे पैरों तक पहुंच सकता है. हमने उनका इलाज हार्ट फेलियर की दवाओं और खून पतला करने वाली दवाओं से शुरू किया, जिससे उनकी हालत में काफी सुधार हुआ. डॉ. अगस्टम के लिए यह मेफेंटर्मिन के गलत इस्तेमाल का तीसरा मामला है, जबकि मेडिकल जगत में ऐसे बहुत कम केस दर्ज हैं.
मौत तक हो सकती है
डॉक्टरों ने पहलवान को बताया कि उसके दिल की काम करने की क्षमता घटकर लगभग 20% रह गई है. आमतौर पर इतनी कम क्षमता गंभीर हार्ट फेलियर में देखी जाती है. एम्स दिल्ली के कार्डियोलॉजी प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस दवा को लेने के बाद शरीर में ताकत महसूस होती है, लेकिन यह उधार की ताकत है. आप दिल को उसकी सुरक्षित सीमा से ज्यादा काम करने के लिए मजबूर कर रहे होते हैं, जिससे उसे नुकसान पहुंचता है. डॉ. अंबुज रॉय के अनुसार, यही सबसे बड़ा खतरा है. वे कहते हैं, मेफेंटर्मिन से बहुत ज्यादा हाई ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन अनियमित होना (अरिदमिया), स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और अचानक मौत तक हो सकती है. खासकर जब इसे बार-बार या ज्यादा शारीरिक मेहनत के दौरान लिया जाए. यह दवा उन युवाओं में भी गंभीर दिल की बीमारी पैदा कर सकती है, जिनमें पहले कोई खास हार्ट से संबंधित परेशानियां हैं.
दवा का कैसे होता है गलत इस्तेमाल
मेफेंटर्मिन सल्फेट एक लाइसेंस प्राप्त दवा है और यह नारकोटिक ड्रग्स की सूची में शामिल नहीं है. इसलिए यह NDPS कानून के तहत नहीं आती. कागजों में यह डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवा है, लेकिन सही निगरानी न होने के कारण कई मेडिकल स्टोर पर यह बिना पर्ची के भी मिल जाती है. अनाबॉलिक स्टेरॉयड या नशीली दवाओं की तुलना में इस दवा के दिल पर पड़ने वाले खतरे को लोग उतनी गंभीरता से नहीं लेते. इसलिए इस पर सख्त नियंत्रण भी नहीं है. हालांकि विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) ने इसे बैन किया हुआ है, लेकिन आम स्तर पर इसकी बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त निगरानी नहीं होने से इसका गलत उपयोग जारी है.
सख्त नियमों की जरूरत क्यों?
खेल नियमों के तहत मेफेंटर्मिन प्रतिबंधित (बैन) दवा है. अगर यह किसी खिलाड़ी के यूरिन टेस्ट में मिल जाती है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है, जुर्माना लग सकता है और कई सालों तक प्रतियोगिता से प्रतिबंधित किया जा सकता है. फिर भी, स्थानीय मेडिकल स्टोर से इसे आसानी से मिलने के कारण नियमों को लागू करना मुश्किल हो जाता है. पहलवान भी मानता है, यह शरीर में काफी समय तक रहता है और टेस्ट में पकड़ा जा सकता है. अगर रिपोर्ट में आ गया तो करियर खत्म हो सकता है. इसके बावजूद कई खिलाड़ी जोखिम उठाते हैं, क्योंकि उन्हें इसके गंभीर स्वास्थ्य परिणामों की पूरी जानकारी नहीं होती.डॉ. रॉय का मानना है कि खेल प्राधिकरणों को इस पर सख्त कदम उठाने चाहिए. वे कहते हैं, दवाओं की सख्त श्रेणी में रखना, मेडिकल स्टोर की नियमित जांच और खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों व डॉक्टरों को जागरूक करना जरूरी है. जिस तरह इसका दुरुपयोग बढ़ रहा है, इसे शेड्यूल H से शेड्यूल X में लाने पर विचार होना चाहिए.
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