एम्स के बर्न डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. मनीष सिंघल ने न्यूज 18 इंडिया से खास बातचीत में बताया कि यह सर्जरी बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाली है, लेकिन टीम पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है. अगर यह ऑपरेशन सफल होता है, तो यह भारत के मेडिकल इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा.
24 से 48 घंटे तक चल सकता है ऑपरेशन
डॉ. मनीष सिंघल के मुताबिक फेस ट्रांसप्लांट कोई नॉर्मल सर्जरी नहीं है. इसे करने में कम से कम 24 से 48 घंटे तक का समय लग सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि चेहरे के कितने हिस्से त्वचा, हड्डी, नसें या मांसपेशियां बदलनी हैं. इस ऑपरेशन में प्लास्टिक सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, माइक्रोवैस्कुलर सर्जन और कई विशेषज्ञ डॉक्टर एक साथ काम मरीज पर काम करेंगे.
किन मरीजों को मिल सकती है नई पहचान?
एम्स की बर्न और प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शिवांगी साहा ने न्यूज 18 इंडिया को बताया कि इन लोगों को फेस ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है. जैसे एसिड अटैक पीड़ित,गंभीर रूप से जले हुए मरीज गन शॉट या हादसे में चेहरा गंवाने वाले लोग. इसके साथ ही ऐसे मरीज जिनकी त्वचा सिकुड़ने से सांस लेने में दिक्कत हो.
जले चेहरे के लिए वरदान साबित होगी ये सर्जरी
डॉ शिवांगी का कहना है कि कई बार जलने के बाद चेहरा इतना विकृत हो जाता है कि सामान्य प्लास्टिक सर्जरी से सुधार संभव नहीं होता. ऐसे मामलों में फेस ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है. साथ ही डोनर और मरीज का जेंडर एक होना जरूरी है, ताकि चेहरे की बनावट और ऊतकों का बेहतर मेल हो सके.
क्या होता है फेस ट्रांसप्लांट?
एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. डी. भौमिक के अनुसार फेस ट्रांसप्लांट एक विशेष सर्जरी है, जिसमें मृत व्यक्ति द्वारा दान किए गए चेहरे के ऊतकों से मरीज का पूरा या आंशिक चेहरा बदला जाता है. इसे मेडिकल भाषा में वैस्कुलर इज कंपोजिट एलोग्राफ्ट(VCA) कहा जाता है. इसमें त्वचा,हड्डियां,नसें,रक्त वाहिकाएं,मांसपेशियां शामिल होते हैं. यह प्रक्रिया काफी हद तक किडनी ट्रांसप्लांट जैसी होती है. मरीज को ऑपरेशन के बाद ऐसी दवाएं लेनी पड़ती हैं, जो शरीर को नए चेहरे को अस्वीकार करने से रोकें.
मानसिक रूप से मजबूत होना भी जरूरी
फेस ट्रांसप्लांट सिर्फ शारीरिक बदलाव नहीं, बल्कि भावनात्मक बदलाव भी है. एम्स के साइकोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रीति के ने न्यूज 18 इंडिया से बातचीत में कहा कि मरीज को मानसिक रूप से तैयार करना सबसे जरूरी होता है. उसे ऑपरेशन से पहले और बाद की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है, ताकि वह नए चेहरे को स्वीकार कर सके और आत्मविश्वास के साथ नई जिंदगी शुरू कर सके.
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