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अतनु चक्रवर्ती 1985 बैच के गुजरात कैडर के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं।
HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को देर रात इस्तीफा दे दिया। बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी है।
चक्रवर्ती ने बैंक के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए हैं। उनके जाने के बाद रिजर्व बैंक की मंजूरी से केकी मिस्त्री को 19 मार्च से तीन महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन बनाया है।
इस्तीफे की खबर के बाद आज HDFC के शेयर में 5% की गिरावट है। ये 43 रुपए गिरकर 800 रुपए के करीब कारोबार कर रहा है। इस साल HDFC बैंक का शेयर करीब 20% टूट चुका है।
चक्रवर्ती बोले- बैंक की प्रैक्टिस मेरे एथिक्स से मेल नहीं खाती
अतनु चक्रवर्ती ने अपने रेजिग्नेशन लेटर में बैंक के इंटरनल कल्चर और कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल के दौरान मैंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाओं और प्रथाओं को देखा है, जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं।
केकी मिस्त्री को 3 महीने के लिए कमान सौंपी गई
केकी मिस्त्री फिलहाल बैंक के बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे हैं। वे HDFC लिमिटेड के बैंक में विलय से पहले उसके वाइस चेयरमैन और CEO रह चुके हैं। बैंकिंग सेक्टर में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें फिलहाल 3 महीने की कमान सौंपी गई है।
केकी मिस्त्री ने गुरुवार को निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को भरोसा दिलाया कि बैंक पूरी तरह स्थिर है। बैंक में चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है। मिस्त्री ने कहा कि बोर्ड देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक में भरोसा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यभार संभालने के बाद केकी मिस्त्री ने भरोसा दिलाया कि बैंक पूरी तरह स्थिर है और चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है।
रिजर्व बैंक बोला- HDFC में कोई गंभीर चिंता की बात नहीं
इस मामले पर रिजर्व बैंक ने कहा कि HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन पद को लेकर बैंक की तरफ से जो अस्थायी व्यवस्था मांगी गई थी, उसे रिजर्व बैंक ने मंजूरी दे दी है।
HDFC बैंक देश का एक ‘सिस्टेमिकली इम्पोर्टेन्ट बैंक’ है, जिसकी वित्तीय हालत मजबूत है। बोर्ड पेशेवर तरीके से काम कर रहा है और मैनेजमेंट टीम काफी काबिल है।
बैंक के कामकाज या गवर्नेंस को लेकर फिलहाल कोई गंभीर चिंता की बात नहीं है। बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और लिक्विडिटी यानी नकदी की स्थिति भी संतोषजनक है। रिजर्व बैंक आगे के रास्तों को लेकर बैंक के बोर्ड और मैनेजमेंट के साथ लगातार संपर्क में बना रहेगा।
मर्जर के बाद देश का दूसरा बड़ा बैंक बना था HDFC
चक्रवर्ती ने अपने कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके समय में ही HDFC लिमिटेड का बैंक के साथ विलय हुआ, जिससे यह देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन गया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मर्जर के पूरे फायदे मिलना अभी बाकी है।
1985 बैच के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं अतनु चक्रवर्ती
अतनु चक्रवर्ती 1985 बैच के गुजरात कैडर के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। 35 साल की सर्विस के दौरान उन्होंने आर्थिक मामलों के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। वे बजट बनाने की प्रक्रिया और निवेश विभाग के प्रमुख भी रह चुके हैं।
- अप्रैल 2021 में चक्रवर्ती को HDFC बैंक का चेयरमैन बनाया गया था।
- मई 2024 में फिर से इस पद पर नियुक्त किया गया था।
- उनका यह कार्यकाल मई 2027 तक चलने वाला था।
नॉलेज बॉक्स: ‘पार्ट-टाइम चेयरमैन’ और ‘अंतरिम चेयरमैन’ में क्या फर्क है?
‘पार्ट-टाइम चेयरमैन’ वह व्यक्ति होता है जो बैंक के रोजमर्रा के मैनेजमेंट में शामिल नहीं होता, बल्कि बोर्ड की बैठकों की अध्यक्षता करता है और नीतिगत फैसलों में गाइडेंस देता है।
वहीं, ‘अंतरिम चेयरमैन’ एक अस्थायी व्यवस्था है, जिसे तब नियुक्त किया जाता है जब अचानक चेयरमैन का पद खाली हो जाए और नए पक्के चेयरमैन की तलाश जारी हो।
चूंकि बैंक में जनता का पैसा जमा होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं, इसलिए रिजर्व बैंक की मंजूरी अनिवार्य है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियुक्त व्यक्ति ‘फिट एंड प्रॉपर’ है और उसके पास बैंक चलाने के लिए जरूरी योग्यता और ईमानदारी है।
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