आज (2 अप्रैल) चैत्र मास की पूर्णिमा यानी हनुमान जी का प्रकट उत्सव है। मान्यता है कि त्रेतायुग में चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जी अवतरित हुए थे। इस पर्व पर हनुमान जी की विशेष पूजा करनी चाहिए। यहां जानिए हनुमान जी की पूजा विधि और पूजा के लिए जरूरी चीजें…
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, चैत्र पूर्णिमा, हनुमान प्रकट उत्सव और गुरुवार के योग में भगवान विष्णु, श्रीराम, हनुमान जी के साथ गुरु ग्रह की विशेष पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही इस तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ने और सुनने की भी परंपरा है। देवराज इंद्र ने वज्र से किया था बालक मारुति पर प्रहार पौराणिक कथा है कि जब मारुति छोटे थे, तब एक दिन उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था। सूर्य को निगलने से सृष्टि में अंधकार छा गया। सभी देवी-देवता परेशान हो गए। उस समय देवराज इंद्र मारुति पर गुस्सा हो गए और अपने वज्र से प्रहार कर दिया।
वज्र के प्रहार से मारुति की हनु यानी ठोड़ी पर चोट लग गई। मारुति पर प्रहार हुआ तो उनके पिता पवन देव गुस्सा हो गए, उन्होंने पूरी सृष्टि की हवा ही रोक दी। तब सभी देवताओं ने पवन देव से प्रार्थना की कि वे वायु को न रोकें, वर्ना सृष्टि नष्ट हो जाएगी।
सृष्टि की भलाई के लिए पवन देव ने देवताओं की यह बात मान ली। इसके बाद सभी देवताओं ने मारुति को अलग-अलग शक्तियां दीं। हनु यानी ठोड़ी पर लगी चोट की वजह से मारुति को नया नाम हनुमान मिला। पूजा-पाठ के साथ दान-पुण्य जरूर करें चैत्र पूर्णिमा पर किए गए दान-पुण्य से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अक्षय पुण्य का अर्थ है ऐसा पुण्य, जिसका प्रभाव जीवनभर बना रहता है। इसलिए इस दिन जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार धन, अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल का दान करना चाहिए। भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का करें अभिषेक चैत्र पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। केसर मिले दूध से भगवान का अभिषेक करें। तुलसी के साथ मिठाई अर्पित करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भगवान विष्णु के अवतार सत्यनारायण की कथा भी पढ़-सुन सकते हैं। पंचदेवों की करें पूजा इस दिन पंचदेव की पूजा करने का भी विधान है। पंचदेव में भगवान शिव, गणेश, विष्णु, देवी दुर्गा और सूर्य देव शामिल हैं। इन सभी देवताओं की पूजा करने से जीवन में संतुलन और सफलता मिलती है। अपने इष्ट देव के मंत्रों का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए। जैसे श्री गणेशाय नमः, ऊँ नमः शिवाय, कृं कृष्णाय नमः, सीता-राम, राधा-कृष्ण और ऊँ रामदूताय नमः जैसे मंत्र और नामों का जप कर सकते हैं।
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