इस साल मार्च में ग्रॉस GST कलेक्शन सालाना आधार पर 8.8% बढ़कर ₹2 लाख करोड़ के पार निकल गया। एक साल पहले मार्च 2025 में यह ₹1.83 लाख करोड़ था। वहीं नेट GST कलेक्शन सालाना आधार पर 8.2% बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए रहा। मार्च 2025 में यह आंकड़ा ₹1.64 लाख करोड़ रहा था। आज 1 अप्रैल को ये आंकड़े जारी किए गए हैं। ग्रॉस GST सरकार का कुल जमा किया गया टैक्स है, जबकि नेट GST वह राशि है जो ग्रॉस कलेक्शन में से करदाताओं यानी टेक्सपेयर्स को लौटाए गए रिफंड को घटाने के बाद बचती है। GST कलेक्शन 10 महीने में सबसे ज्यादा टोटल रिफंड 13.8% बढ़कर 0.22 लाख करोड़ रुपए रहा वहीं टोटल रिफंड सालाना आधार पर 13.8% बढ़कर 0.22 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। मार्च 2025 में यह आंकड़ा ₹0.19 लाख करोड़ था। ग्रॉस डोमेस्टिक रेवेन्यू (CGST, SGST, IGST) 1.46 लाख करोड़ रुपए रहा, जिसमें सालाना आधार पर 5.9% की बढ़ोतरी हुई। जबकि ग्रॉस इम्पोर्ट रेवेन्यू (IGST) 0.54 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 17.8% रहा। वहीं मार्च 2026 में नेट सेस रेवेन्यू घटकर -177 करोड़ रुपए रहा। मार्च 2025 में यह 12,043 करोड़ रुपए रहा था। GST कलेक्शन में महाराष्ट्र-कर्नाटक सबसे आगे रहे GST कलेक्शन में महाराष्ट्र (+17%), कर्नाटक(+14%) और तेलंगाना (+19%) जैसे बड़े राज्यों ने ग्रोथ दर्ज की है। वहीं हरियाणा, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में ग्रोथ धीमी रही है। सबसे ज्यादा टैक्स कलेक्शन अप्रैल 2025 में हुआ था सरकार ने अप्रैल 2025 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से 2.37 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। सालाना आधार पर इसमें 12.6% की बढ़ोतरी हुई थी। यह GST कलेक्शन का रिकॉर्ड है। इससे पहले हाईएस्ट जीएसटी कलेक्शन का रिकॉर्ड अप्रैल 2024 में बना था। तब सरकार ने 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। इकोनॉमी की सेहत दिखाता है GST कलेक्शन जीएसटी कलेक्शन यह बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी तंदुरुस्त है। अगर कलेक्शन ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं, फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ रहा है और लोग ईमानदारी से टैक्स भर रहे हैं। 2017 में लागू हुआ था GST सरकार ने 1 जुलाई 2017 को देशभर में GST लागू किया था। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के 17 करों और 13 उपकरों को हटा दिया गया था। GST को चार हिस्सों में डिवाइड किया गया है: CGST (केंद्रीय जीएसटी): केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किया जाता है। SGST (राज्य जीएसटी): राज्य सरकारों द्वारा एकत्र किया जाता है। IGST (एकीकृत जीएसटी): अंतरराज्यीय लेनदेन और आयात पर लागू, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभाजित। उपकर (सेस): स्पेसिफिक पर्पज के लिए फंड जुटाने के लिए स्पेसिफिक गुड्स (जैसे, लग्जरी आइटम्स, तंबाकू) पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क। ये खबर भी पढ़ें… रिसर्च-AI डेटा सेंटर्स से बढ़ रहा धरती का तापमान: सेंटर्स के आसपास 2 डिग्री तक गर्मी बढ़ी, भारत में 8 सेंटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डेटा सेंटर्स से तापमान बढ़ रहा है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च में कहा गया कि जहां ये डेटा सेंटर्स काम कर रहे हैं, वहां औसतन 2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ गया है। वैज्ञानिकों ने इसे ‘डेटा हीट आइलैंड इफेक्ट’ नाम दिया है। पूरी खबर पढ़ें…
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