सरकार ने शुक्रवार को सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) को सहायता देने के लिए सीमित अवधि के लिए 20,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना को मंजूरी दी। ये संस्थान पिछले कुछ समय से धन जुटाने में आ रही कठिनाइयों की शिकायत कर रहे थे।
सार्वजनिक क्षेत्र की राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी (एनसीजीटीसी) ने एक परिपत्र में कहा कि सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए ऋण गारंटी योजना 2.0 के तहत सदस्य ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) द्वारा जून के अंत तक दिए गए ऋण शामिल किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि समाज के निचले तबके को ऋण उपलब्ध कराने वाले सूक्ष्म वित्त संस्थान (एमएफआई) बढ़ते फंसे कर्ज (एनपीए) के कारण कठिन दौर से गुजर रहे हैं। इसके कारण उनके कर्जदाता आगे और ऋण देने में सतर्क हो गए हैं।
एनसीजीटीसी ने कहा कि सदस्य ऋणदाता संस्थान (एमएलआई) अपने आकलन के आधार पर एमएफआई या एनबीएफसी-एमएफआई को धन उपलब्ध कराएंगे, ताकि वे पात्र छोटे उधारकर्ताओं को आगे ऋण दे सकें। साथ ही, ब्याज दरों पर कुछ शर्तें भी लागू की जाएंगी।
एनसीजीटीसी ने कहा कि इस ऋण गारंटी योजना का लाभ पाने के लिए एमएलआई द्वारा एनबीएफसी-एमएफआई/एमएफआई को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दर बाहरी मानक आधारित उधार दर (ईबीएलआर) या एक वर्ष की निधि लागत आधारित उधार दर से अधिकतम दो प्रतिशत ज्यादा तक सीमित रखी गई है।
इसके अलावा, एमएफआई को छोटे उधारकर्ताओं को ऋण पिछले छह महीनों की अपनी औसत ब्याज दर से कम से कम एक प्रतिशत कम दर पर देना होगा।
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