अक्सर पीठ पीछे बात करने को लोग बुराई मानते हैं, लेकिन मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह इंसानी व्यवहार का बुनियादी हिस्सा है। अमेरिका में नॉक्स कॉलेज के मनोवैज्ञानिक फ्रैंक मैकएंड्रयू के मुताबिक गॉसिप सिर्फ किसी की छवि बिगाड़ना नहीं, बल्कि किसी गैर-मौजूद व्यक्ति के बारे में चर्चा भी है। दशकों की रिसर्च बताती है कि गॉसिप ने सभ्यता की शुरुआत से समाज को जोड़े रखने में बड़ी भूमिका निभाई है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मेगन रॉबिन्स के मुताबिक गॉसिप से लोग बिना खुद गलती किए सामाजिक नियम सीख लेते हैं। ज्यादातर गॉसिप न्यूट्रल, जेंडर मिथक भी टूटा रॉबिन्स की रिसर्च के अनुसार, गॉसिप का बड़ा हिस्सा न तो बुरा होता है और न ही अच्छा, बल्कि यह न्यूट्रल जानकारी होती है। स्टडी ने उस मिथक को भी तोड़ दिया कि केवल महिलाएं गॉसिप करती हैं। सच यह है कि पुरुष भी इसमें बराबर के भागीदार हैं। ज्यादा मिलनसार लोग गॉसिप करने में सबसे आगे पाए गए। अच्छी गॉसिप दूसरों को जवाबदेह बनाती है विशेषज्ञों के अनुसार, गॉसिप की अच्छाई या बुराई इरादे पर टिकी है। अच्छी गॉसिप दूसरों को जवाबदेह बनाती है। बुरी गॉसिप का मकसद केवल अपमान करना होता है। इसलिए, बोलने से पहले यह जरूर सोचें कि आप रिश्ते जोड़ रहे हैं या तोड़ रहे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं-यह एक सोशल स्किल भी मैकएंड्रयू के अनुसार, गॉसिप एक सामाजिक कौशल है। एक कुशल गॉसिपर वह है जो जानकारी तो रखता है, लेकिन उसे जिम्मेदारी और गोपनीयता के साथ साझा करता है। ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति का समाज में सम्मान होता है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.