आज ही के दिन यानी की 01 अप्रैल को केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म हुआ था। के.बी हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नींव रखी थी। वह संघ के पहले सरसंघचालक बने। उन्होंने शुरूआत से ही संघ को सक्रिय राजनीति से दूर सिर्फ धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों तक सीमित रखा। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और परिवार
नागपुर के एक संभ्रांत परिवार में 01 अप्रैल 1889 को केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म हुआ था। वहीं साल 1902 में प्लेग महामारी में उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी। इस समय के बी हेडगेवार की उम्र 13 साल थी। जब वह हाई स्कूल में थे तो ‘वंदे मातरम’ का नारा लगाने पर हेडगेवार को स्कूल से निकाल दिया गया था। 1910 में वह मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता गए। वह जब डॉक्टर बनकर नागपुर वापस आए, तो उन्होंने एक भी दिन प्रैक्टिस नहीं की।
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आजादी की लड़ाई से जुड़े
हेडगेवार कांग्रेस से जुड़ गए और साल 1921 के असहयोग आंदोलन में उग्र भाषण देने के आरोप में हेडगेवार को एक साल की सजा सुनाई गई। जेल से छूटने के बाद देश भर में भड़के भीषण सांप्रदायिक दंगों ने उनको झझकोर कर रख दिया। उनको समझ आ गया कि तत्कालिक राजनीतिक उत्तेजना नहीं बल्कि दीर्घकालिक ‘चरित्र निर्माण’ की जरूरत महसूस हुई।
आरएसएस की स्थापना
इस वैचारिक मंथन से ही 27 सितंबर 1925 को नागपुर के एक मैदान में कुछ बच्चों के साथ आरएसएस यानी की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना हुई। उन्होंने शाखा को सिर्फ शारीरिक व्यायाम का अखाड़ा नहीं बल्कि सामाजिक समानता की माइक्रोलैब भी बनाई। उन्होंने संघ की रोजमर्रा की दलगत राजनीति से दूऱ रखी। लेकिन कभी स्वतंत्रता संग्राम से कभी पीठ नहीं दिखाई। साल 1930 महात्मा गांधी ने सविनय आंदोलन शुरू किया। तब हेडगेवार ने सरसंघचालक का पद छोड़ दिया और हजारों स्वयंसेवकों के साथ ‘जंगल सत्याग्रह’ किया। इस दौरान उन्होंने 9 महीने की जेल की सजा काटी।
मृत्यु
वहीं 21 जून 1940 को 51 साल की उम्र में केशव बलिराम हेडगेवार का निधन हो गया था।
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