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घूसखोर पंडत फिल्म में मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार निभा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल को लेकर फिल्ममेकर और नेटफ्लिक्स को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि समाज के किसी वर्ग को ऐसे नाम से बदनाम नहीं किया जा सकता।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ब्राह्मण समाज की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान बेंच ने कहा,

जब तक फिल्म का बदला हुआ नाम नहीं बताया जाएगा, तब तक इसे रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और फिल्म निर्माता नीरज पांडेय को नोटिस जारी किया है। साथ ही नीरज पांडे से पूछा कि वे फिल्म का नाम बदलकर नया नाम क्या रखना चाहते हैं और अदालत को आज ही इसका जवाब दें।
कोर्ट ने पांडे को यह भी आदेश दिया है कि वह हलफनामा दाखिल करें, जिसमें स्पष्ट किया जाए कि फिल्म घूसखोर पंडत किसी भी सामाजिक वर्ग का अपमान नहीं करती। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

टीजर के साथ फिल्म के नाम का ऐलान हुआ था
नेटफ्लिक्स ने 3 फरवरी 2026 को मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडत’ का ऐलान भी टीजर रिलीज करके किया गया था। लेकिन जैसे ही इसका टीजर जारी किया गया तो इसके टाइटल को लेकर विवाद शुरू हो गया है। लोग सड़कों पर उतर गए। इसके बाद यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया।
टीजर में मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिन्हें दिल्ली में ‘पंडित’ के नाम से जाना जाता है। फिल्म में उन्हें एक बदनाम पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया है। टीजर के मुताबिक, दीक्षित 20 साल पहले एसआई के रूप में भर्ती हुए थे और अपने किए गए कारनामों की वजह से उन्हें बार-बार डिमोट किया गया।

फिल्म में मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार निभा रहे हैं।
ब्राह्मण समाज ने फिल्म का विरोध किया
अलग-अलगह जगहों पर ब्राह्मण समाज ने नेटफ्लिक्स की ‘घूसखोर पंडत’ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा मुंबई के वकील आशुतोष दुबे का आरोप है कि ‘पंडत’ जैसे सम्मानजनक शब्द को भ्रष्टाचार के साथ जोड़ना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे पूरे समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचती है। नोटिस में कहा गया है कि यह फिल्म जानबूझकर एक समुदाय की छवि को खराब करने की कोशिश कर रही है।
यह केवल क्रिएटिव फ्रीडम नहीं है बल्कि कला के नाम पर किसी समुदाय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। उनका कहना है कि फिल्म का नाम केवल सनसनी फैलाने के इरादे से रखा गया है, जिसमें सामाजिक संवेदनशीलता की अनदेखी की गई है। इसके साथ ही, वकील ने फिल्म का नाम बदलने की मांग भी की है।
फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर हटाया गया
फिल्म का टीजर और उससे जुड़ा सभी प्रमोशनल कंटेंट नेटफ्लिक्स इंडिया के सोशल मीडिया अकाउंट्स और यूट्यूब से हटा दिया गया। फिल्म को लेकर नीरज पांडे ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा,
हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के लिए आम बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। इस कहानी का फोकस एक व्यक्ति के काम और उसके फैसलों पर है। इसका किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है और न ही यह किसी का प्रतिनिधित्व करती है।

उन्होंने आगे लिखा, एक फिल्ममेकर के तौर पर मैं अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता हूं और ऐसी कहानियां कहना चाहता हूं जो सोच-समझकर और सम्मान के साथ बनाई जाएं। यह फिल्म भी मेरे पिछले कामों की तरह ईमानदार नीयत से और सिर्फ दर्शकों के मनोरंजन के लिए बनाई गई है।

मनोज बाजपेयी ने भी दी थी सफाई
बता दें, इस फिल्म को लेकर विवाद बढ़ने के बाद एक्टर मनोज बाजपेयी ने भी सफाई दी थी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा था, लोगों ने जो भावनाएं और चिंताएं शेयर की हैं, मैं उनका सम्मान करता हूं और उन्हें गंभीरता से लेता हूं। जब आप किसी ऐसी चीज का हिस्सा होते हैं जिससे कुछ लोगों को ठेस पहुंचती है, तो वह आपको रुककर सोचने और सुनने के लिए मजबूर करती है। एक अभिनेता के तौर पर मैं किसी फिल्म से अपने किरदार और कहानी के माध्यम से जुड़ता हूं। मेरे लिए यह एक कमियों से भरे व्यक्ति और उसकी आत्मबोध की यात्रा को दर्शाने का प्रयास था। इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय के बारे में कोई बयान देना नहीं था।
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