एआई समिट में हिस्सा लेने आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि फ्रांस अब रूस की जगह ले लेगा. ये कयास इसलिए लगाए जा रहे क्योंकि भारत ने जहां हथियार और दूसरे सैन्य साजो सामान के लिए रूस पर निर्भरता कम कर दी है तो वहीं फ्रांस से लगातार रक्षा सहयोग बढ़ता जा रहा है.
मैक्रों के दौरे के दौरान, भारत और फ्रांस के बीच कई बड़े रक्षा सौदे होने जा रहे हैं या फिर चर्चा होने जा रही है. मैक्रों का भारत दौरा कितना अहम है, इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ उनके देश की रक्षा मंत्री कैथरिन वातरिन भी भारत आई हैं और भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से खास डिफेंस डायलॉग में हिस्सा ले रही हैं.
एक दूसरे की सेना में तैनात होंगे मिलिट्री ऑफिसर
मैक्रों के दौरे के दौरान, भारत और फ्रांस में अगले 10 वर्षों के लिए डिफेंस फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं. इस फ्रेमवर्क के तहत, भारत और फ्रांस की सेना यानी थलसेना में एक-दूसरे के अधिकारी तैनात किए जाएंगे. पहली बार ऐसा हो रहा है कि भारतीय सेना में किसी दूसरे सेना के अधिकारी तैनात किए जा रहे हैं. हालांकि, इस करार से भारत से ज्यादा फ्रांस को मदद होने जा रही है क्योंकि भारत के मुकाबले फ्रांस की लैंड फोर्सेज की संख्या बेहद कम है. रूस-यूक्रेन जंग की आग यूरोप तक ना फैल जाए, ऐसे में फ्रांस को भारतीय सेना से युद्ध लड़ने की ट्रेनिंग में अहम मदद मिल सकती है.
दौरे से पहले 114 मेक इन इंडिया राफेल फाइटर जेट को मंजूरी
इमैनुएल मैक्रों के दौरे से ठीक पहले, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 रफाल फाइटर जेट, भारत में बनाए जाने की मंजूरी दी है. इसके लिए फ्रांस की दासो (दसॉल्ट) कंपनी भारत की किसी स्वदेशी कंपनी के साथ मिलकर भारत में रफाल फाइटर जेट बनाने का प्लांट लगाएगी. ये पूरा प्रोजेक्ट करीब 03 लाख 25 हजार करोड़ का होने जा रहा है. माना जा रहा है कि निकट भविष्य में भारतीय नौसेना की जरूरत के लिए राफेल के मरीन वर्जन का निर्माण भी यहां हो सकता है. इसके लिए दूसरे एशियाई देशों को भी राफेल फाइटर जेट इसी प्लांट से एक्सपोर्ट किए जाएंगे.
पुराने हेलीकॉप्टर को रिप्लेस करेंगे फ्रांसीसी एलयूएच हेलीकॉप्टर
इसके अलावा पीएम मोदी और मैक्रों बेंगलुरु के करीब यूरोप की एयरबस और टाटा कंपनी द्वारा साझा तौर से लगाए जा रहे हेलीकॉप्टर प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे. इस प्लांट में भारतीय सेना के लिए लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर यानी एच-125 एलयूएच हेलीकॉप्टर का निर्माण किया जाएगा. ये एलयूएच हेलीकॉप्टर, भारतीय सेना और वायुसेना के पुराने पड़ चुके चीता और चेतक हेलीकॉप्टर को रिप्लेस करेंगे. इसके उद्घाटन के दौरान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री खुद प्लांट में मौजूद रहेंगी.
ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल होने वाले हैमर बम बनेंगे भारत में
मैक्रों जब भारत में होंगे, तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की डिफेंस मिनिस्टर की मौजूदगी में फ्रांस की साफरान कंपनी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी बीईएल के साथ भारत में हैमर बम बनाने का करार करेगी. फ्रांस की साफरान कंपनी इन हैमर बम का निर्माण करती है और इन्हें राफेल से लॉन्च किया जाता है. आसमान से जमीन पर मार करने वाले इन हाइली एजाइल मोडयूलर म्युनिशन एक्सटेंडेड रेंज (HAMMER), एक स्टैंड ऑफ वेपन (बम) है जिसकी रेंज करीब 70 किलोमीटर है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, इन हैमर बम का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाले आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा के हेडक्वार्टर को तबाह करने के लिए किया था. इस हैमर बम को मिराज-2000 और स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस से भी दागा जा सकता है. यही वजह है कि इन बमों को अब भारत में बनाया जाएगा.
फ्रांस से खरीदे जाएंगे 400 स्कैल्प मिसाइल
हैमर बम के भारत में निर्माण के अलावा, भारत, राफेल फाइटर जेट के लिए करीब 400 स्कैल्प मिसाइल भी खरीदने जा रहा है. करीब 300 किलोमीटर तक और हवा से जमीन पर मार करने वाले इन मिसाइलों का इस्तेमाल भी भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया था.
अतिरिक्त स्कोर्पीन क्लास सबमरीन भी पाइप लाइन में
राफेल, एलयूएच, हैमर और स्कैल्प मिसाइल के अलावा, भारत फ्रांस से तीन एडिशनल स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन बनाने को लेकर भी चर्चा कर रहा है. भारतीय नौसेना, फ्रांस की मदद से मझगांव डॉकयार्ड में बनी बनी छह स्कोर्पीन, जिन्हें हम कलवरी क्लास पनडुब्बियां पहले से इस्तेमाल कर रही है.
इतनी बड़ी संख्या में भारतीय सेना यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना द्वारा फ्रांसीसी हथियारों के इस्तेमाल को लेकर अब ये कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या रक्षा संबंधों में रूस की जगह अब फ्रांस ले लेगा. क्योंकि एक समय में भारतीय सेनाएं रूस के बने हथियारों, फाइटर जेट, टैंक और मिसाइलों पर निर्भर रहती थी. पिछले 10-15 सालों में भारत ने रूस पर निर्भरता बेहद कम कर दी है. इसका एक बड़ा कारण रूस-यूक्रेन युद्ध भी है. साथ में भारत के अमेरिका, फ्रांस और दूसरे पश्चिमी देशों से मजबूत होते संबंध भी हैं.
ग्लोबल थिंक टैंक स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सिपरी के मुताबिक, 2010-14 के बीच भारत, रूस के 72 फीसदी हथियार और दूसरे सैन्य साजो सामान का इस्तेमाल करता था. हालांकि 2020-24 के बीच ये घटकर महज 38 फीसदी रह गया, यानी करीब 55 प्रतिशत की गिरावट आई. इसी दौरान (2020-24) के बीच फ्रांस के हथियारों का इस्तेमाल भारत ने 28 फीसदी बढ़ाया. यानी दूसरे स्थान पर.
रक्षा सहयोग में रूस की भागीदारी हो रही कम
फ्रांस जहां अब भारत में राफेल फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और मिसाइलों का निर्माण कर रहा है वहीं रूस के साथ रक्षा सहयोग कम हो रहा है. सुखोई फाइटर जेट का निर्माण बंद हो चुका है. साल 2019 में रूस के साथ हुए एस-400 मिसाइल सौदे की दो (02) बैटरी की सप्लाई में काफी देरी चल रही है. माना जा रहा है कि यूक्रेन जंग के चलते, रूस इन बैटरियों की सप्लाई समय पर नहीं कर पाया है. रूस ने हाल में भारत को अपने SU-57 फाइटर जेट देने की पेशकश की थी. यहां तक की साझा मेक इन इंडिया निर्माण का भी ऑफर दिया था, लेकिन भारत ने फाइटर जेट के साझा निर्माण के लिए रूस की जगह फ्रांस को चुना है. ऐसे में हथियारों की सप्लाई में रूस की भागीदारी कम हो रही है फ्रांस की बढ़ती जा रही है.
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