दुनियाभर में कोविड टीके को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है, जिसकी वजह एक बयान और उसके बाद हुई चर्चाएं बनी हैं। इस बार मामला तब सुर्खियों में आया जब कारोबारी एलन मस्क ने कहा कि कोविड टीके की दूसरी खुराक लेने के बाद उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी हालत बेहद खराब हो रही है।
बता दें कि यह बयान उस समय आया जब एक पुराने वीडियो ने सोशल मीडिया पर तेजी से ध्यान खींचा। इस वीडियो में डॉ हेलमुट स्टर्ज नाम के एक विशेषज्ञ जर्मनी की संसद की एक समिति के सामने अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कोविड के टीकों को मंजूरी देने से पहले जरूरी शुरुआती परीक्षण पूरी तरह नहीं किए गए।
मौजूद जानकारी के अनुसार, डॉ स्टर्ज पहले एक बड़ी दवा कंपनी में विष विज्ञान विभाग से जुड़े रहे हैं, लेकिन वह साल 2007 में सेवानिवृत्त हो चुके थे, यानी कोविड टीके के विकास से काफी पहले। उन्होंने अपनी गवाही में कहा कि कुछ महत्वपूर्ण परीक्षण जैसे कैंसर से जुड़े जोखिम और प्रजनन क्षमता पर असर को लेकर पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया।
गौरतलब है कि उन्होंने जर्मनी की औषधि निगरानी संस्था द्वारा दर्ज करीब 2133 मौतों का जिक्र किया, जो टीकाकरण के बाद रिपोर्ट की गई थीं। इसके बाद उन्होंने एक अनुमान के आधार पर यह संख्या कई गुना ज्यादा होने की बात कही। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अनुमान है, न कि किसी वैज्ञानिक अध्ययन से निकला निष्कर्ष।
बता दें कि टीकाकरण के बाद किसी घटना की रिपोर्ट होना और यह साबित होना कि वही टीका उसका कारण है, दोनों अलग-अलग बातें होती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि ऐसे आंकड़ों का सीधा मतलब कारण साबित करना नहीं होता।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यूरोप की दवा नियामक एजेंसियों ने पहले ही कहा है कि कोविड टीकों को उस समय के मानकों के अनुसार मंजूरी दी गई थी और उनके फायदे जोखिम से ज्यादा रहे हैं। कई शोधों में यह भी सामने आया है कि जहां टीकाकरण दर ज्यादा रही, वहां मौतों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही।
गौरतलब है कि कुछ दुर्लभ मामलों में टीके के बाद दिल से जुड़ी सूजन जैसी समस्याएं सामने आई हैं, लेकिन इन्हें बहुत कम संख्या में देखा गया है। वहीं, शोध यह भी बताते हैं कि खुद कोविड संक्रमण से ऐसी समस्याओं का खतरा ज्यादा होता है।
इस पूरे मामले में एलन मस्क के बयान ने बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की गवाही को लेकर व्यापक चर्चा क्यों नहीं हो रही। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक बयान या अनुमान को पूरी सच्चाई मान लेना उचित नहीं है और हर दावे को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर परखना जरूरी है।
मौजूद हालात यह दिखाते हैं कि कोविड टीकों को लेकर सवाल और चर्चा अभी भी जारी है। वैज्ञानिक समुदाय इन मुद्दों पर लगातार अध्ययन कर रहा है, लेकिन अब तक उपलब्ध प्रमाण यही संकेत देते हैं कि टीकों ने महामारी के दौरान बड़ी संख्या में जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है।
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