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अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि डग ग्रीर ने घोषणा की है कि अमेरिका स्टील और एल्युमीनियम पर लगाए गए टैरिफ के नियमों में बदलाव और लचीलापन लाने के लिए तैयार है. यह खबर भारतीय स्टील निर्यातकों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि भारत पहले से ही अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत के उन्नत चरण में है. ग्रीर का बयान यह संकेत देता है कि 18% का वर्तमान टैरिफ केवल शुरुआत है और आने वाले पूर्ण समझौते में भारतीय स्टील व एल्युमीनियम को ‘जीरो टैरिफ’ या नाममात्र के शुल्क के साथ अमेरिकी बाजार में प्रवेश मिल सकता है. इसका मुख्य उद्देश्य चीन की बाजार हिस्सेदारी को कम करना और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को और गहरा करना है.
नई दिल्ली. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) डग ग्रीर ने 17 फरवरी 2026 को दिए एक महत्वपूर्ण बयान में स्टील और एल्युमीनियम पर लगाए गए आयात शुल्कों (tariffs) के कार्यान्वयन में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं. सीएनबीसी (CNBC) को दिए इंटरव्यू में ग्रीर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इन शुल्कों के प्रवर्तन (enforcement) को अधिक लचीला और ‘एडजस्ट’ करने के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापारिक जगत अमेरिकी टैरिफ नीति में ढील का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, और ग्रीर का यह रुख व्यापार नियमों को और अधिक सटीक और व्यापार-अनुकूल बनाने की मंशा को दर्शाता है.
भारत के नजरिए से यह बयान एक बड़ी कूटनीतिक जीत की आहट है, क्योंकि भारत पहले ही 7 फरवरी 2026 को हुए अंतरिम समझौते के बाद 18% के रियायती टैरिफ दायरे में आ चुका है. ग्रीर द्वारा ‘एडजस्टमेंट’ की बात करना यह संकेत देता है कि आने वाले समय में भारत जैसे रणनीतिक साझेदारों के लिए नियमों को और भी सरल बनाया जाएगा. यह न केवल भारतीय निर्यातकों के लिए कागजी कार्रवाई के बोझ को कम करेगा, बल्कि कुछ विशेष औद्योगिक क्षेत्रों में टैक्स की दरों को और नीचे ले जाने का रास्ता भी साफ करेगा.
डग ग्रीर के बयान के मुख्य बिंदु
अमेरिकी व्यापार वार्ताकार ने टैरिफ व्यवस्था में सुधार के लिए निम्नलिखित तर्क दिए हैं:
- व्यापारिक सरलता: ग्रीर के अनुसार, कई कंपनियां टैरिफ के अनुपालन और गणना (compliance and calculation) में ही उलझी रहती हैं. वे चाहते हैं कि कंपनियां इस जटिलता के बजाय अपने मूल व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करें.
- लचीला प्रवर्तन: उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका टैरिफ लगाने के अपने तरीकों को ‘समायोजित’ (Adjust) कर सकता है ताकि वैध व्यापार में बाधा न आए.
- रणनीतिक लक्ष्य: यह बदलाव उन देशों के लिए फायदेमंद होगा जो अमेरिकी मानकों का पालन करते हैं और चीन जैसे देशों से आने वाले अनुचित माल के खिलाफ अमेरिका के साथ खड़े हैं.
क्या भारतीय स्टील पर 0% टैरिफ संभव है?
- पूर्ण शुल्क मुक्ति की राह: ग्रीर का ‘एडजस्टमेंट’ वाला बयान इस संभावना को जन्म देता है कि मार्च 2026 में होने वाले पूर्ण व्यापार समझौते (BTA) में भारतीय स्टील पर बचे हुए 18% टैक्स को घटाकर 0% किया जा सकता है.
- कोकिंग कोल डील का प्रभाव: अमेरिका भारत को जीरो टैरिफ की छूट तब दे सकता है जब भारत अपनी स्टील मिलों के लिए कच्चा माल (जैसे कोकिंग कोल) अमेरिका से ही खरीदने की प्रतिबद्धता जताए.
- चीन को पछाड़ने का मौका: अगर भारत को 0-10% के स्लैब में रखा जाता है और चीन पर 50% का भारी टैक्स बना रहता है, तो भारतीय स्टील अमेरिकी बाजार में सबसे प्रतिस्पर्धी बन जाएगा.
भारत-अमेरिका व्यापार
| श्रेणी | वर्तमान स्थिति (7 Feb 2026) | भविष्य की संभावना (March 2026) |
| औसत टैरिफ दर | 18% (रियायती) | 0% से 10% के बीच |
| प्रमुख निर्यात | चुनिंदा स्टील और एल्युमीनियम उत्पाद | सभी औद्योगिक और इंजीनियरिंग गुड्स |
| व्यापारिक दर्जा | अंतरिम साझेदार | पूर्ण रणनीतिक व्यापार साझेदार |
About the Author

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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