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फिच रेटिंग्स ने भविष्यवाणी की है कि 2026 में 6.4% की दर के साथ भारत एशिया की सबसे तेज बड़ी अर्थव्यवस्था रहेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ हालिया व्यापार समझौतों के जरिए संभावित टैरिफ जोखिमों को कुशलता से संतुलित किया है. साथ ही, आरबीआई द्वारा ब्याज दरों को 5.25% पर स्थिर रखने की संभावना जताई गई है.
नई दिल्ली. भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वैश्विक स्तर से एक उत्साहजनक रिपोर्ट सामने आई है. फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) के अनुसार, भारत साल 2026 में भी एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. रेटिंग एजेंसी ने अनुमान जताया है कि इस अवधि के दौरान भारत की विकास दर 6.4 प्रतिशत रहेगी, जो इसे फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे क्षेत्रीय देशों से काफी आगे रखता है.
फिच की रिपोर्ट बताती है कि भारत की अर्थव्यवस्था की संरचना कुछ इस तरह है कि वैश्विक व्यापारिक बदलावों का इस पर बहुत कम असर होने की संभावना है. एजेंसी का मानना है कि निर्माण निर्यात (manufacturing exports) पर कम निर्भरता और घरेलू बाजार की मजबूती के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों के खिलाफ अधिक सुरक्षित है. इसके साथ ही सरकार की नई व्यापारिक नीतियों ने भी भविष्य के जोखिमों को कम करने में मदद की है.
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत स्थिति
फिच रेटिंग्स के अनुसार, भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस की अर्थव्यवस्थाएं निकट भविष्य में व्यापारिक पैटर्न में होने वाले बदलावों से सबसे कम प्रभावित होंगी. इसकी मुख्य वजह इन देशों की अपेक्षाकृत बंद अर्थव्यवस्थाएं और निर्यात पर कम निर्भरता है. विशेष रूप से भारत ने अपनी व्यापारिक रणनीतियों में बड़ा बदलाव किया है. अमेरिकी टैरिफ के जोखिमों से बचने के लिए भारत ने अमेरिका के बाहर अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को विस्तार दिया है. हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुआ व्यापारिक समझौता इसी रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है.
व्यापारिक समझौते और अमेरिकी टैरिफ का असर
रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत ने पिछले दो महीनों में अमेरिका और यूरोपीय संघ दोनों के साथ महत्वपूर्ण सौदे सुरक्षित किए हैं. 6 फरवरी को अमेरिका के साथ हुए समझौते ने व्यापारिक अनिश्चितताओं को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है. हालांकि रेटिंग एजेंसी का यह भी मानना है कि अमेरिकी टैरिफ का वास्तविक प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन भारत की सक्रिय विदेश नीति ने सुरक्षा कवच तैयार कर लिया है.
मौद्रिक नीति और ब्याज दरों पर नजर
नीतिगत मोर्चे पर फिच ने अनुमान जताया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) निकट भविष्य में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. पिछले दिसंबर में की गई कटौती के बाद अब पॉलिसी रेट के 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है. एजेंसी के अनुसार, मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए आरबीआई अभी ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में रहेगा.
राजकोषीय पारदर्शिता और कर्ज का दबाव
फिच ने भारत सरकार द्वारा राजकोषीय पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की है. जीएसटी (GST) और उच्च विकास दर के कारण राजस्व में आई बढ़त से मध्यम अवधि में सरकारी कर्ज में मामूली कमी आने की संभावना है. हालांकि, रिपोर्ट में एक चेतावनी भी दी गई है कि जीडीपी के मुकाबले कर्ज (Debt to GDP) का अनुपात अभी भी ऊंचा रहने की आशंका है, जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत होगी.
मुख्य पॉइंट्स: फिच रेटिंग्स की रिपोर्ट के बड़े निष्कर्ष
- विकास दर: 2026 में भारत की जीडीपी 6.4% की दर से बढ़ने का अनुमान.
- क्षेत्रीय तुलना: भारत अपने पड़ोसी देशों फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया से आगे रहेगा.
- व्यापारिक सुरक्षा: यूरोपीय संघ और अमेरिका (6 फरवरी) के साथ हुए सौदे व्यापारिक जोखिम कम करेंगे.
- ब्याज दरें: आरबीआई द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने की संभावना.
- राजस्व: जीएसटी और बेहतर विकास दर से सरकारी खजाने की स्थिति मजबूत होगी.
एशियाई बाजार में भारत का दबदबा
एशियाई क्षेत्र में भारत की यह बढ़त दिखाती है कि वैश्विक मंदी या व्यापारिक युद्ध की आशंकाओं के बीच भी भारतीय बाजार निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है. बेहतर बुनियादी ढांचे और राजकोषीय प्रबंधन ने भारत को एक स्थिर अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है. यदि सरकार इसी तरह व्यापारिक समझौतों और पारदर्शिता पर जोर देती रहती है, तो 2026 के बाद भी यह बढ़त जारी रह सकती है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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