ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा,“Board of Peace इतिहास का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संगठन साबित होगा और इसका अध्यक्ष बनकर मुझे गर्व है.” बोर्ड के सदस्यों की तरफ से ये वादे गुरुवार को वाशिंगटन में बोर्ड की पहली बैठक में औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे.
कौन-कौन मदद करेगा?
अभी तक यह साफ नहीं है कि 20 से ज्यादा सदस्य देशों में से कौन बैठक में आएगा. ट्रंप ने यह भी नहीं बताया कि कौन सा देश गाजा में पुनर्निर्माण या सुरक्षा बल भेजेगा. इंडोनेशिया की सेना ने कहा है कि जून के अंत तक 8,000 सैनिक गाजा में शांति और मानवीय मिशन के लिए तैनात हो सकते हैं.
पहली बैठक में कौन होंगे शामिल?
अभी तक यह पता नहीं है कि बोर्ड के कितने सदस्य पहली बैठक में आएंगे. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जिन्होंने हाल ही में ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी, इस बैठक में शामिल नहीं होंगे. शुरुआत में यह बोर्ड सिर्फ इजरायल-हमास युद्ध को रोकने के लिए बनाया गया था. लेकिन अब यह बोर्ड दुनिया के बड़े संकटों को हल करने की योजना भी बना रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अमेरिका का संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद का विकल्प बन सकता है. कई यूरोपीय देश और अमेरिका के अन्य साथी इस योजना में शामिल होने से हिचकिचा रहे हैं क्योंकि उन्हें संदेह है कि यह सुरक्षा परिषद का मुकाबला कर सकता है.
बैठक कहां होगी?
ट्रंप ने बताया कि गुरुवार की बैठक US Institute of Peace में होगी. विदेश विभाग ने दिसंबर में कहा था कि इसे अब ‘Donald J Trump US Institute of Peace’ कहा जाएगा. लेकिन यह जगह अभी भी पूर्व कर्मचारियों और संस्थान के अधिकारियों के मुकदमे का विषय बनी हुई है. पिछले साल अमेरिकी प्रशासन ने इस संस्थान के ज्यादातर कर्मचारियों को निकाल दिया था.
गाजा का पुनर्निर्माण है बड़ी चुनौती
गाजा का फिर से निर्माण बहुत मुश्किल काम होगा. संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ के अनुमान के मुताबिक, इसमें लगभग 70 अरब डॉलर खर्च आएगा. दो साल से ज्यादा समय तक हुए इजरायल-हमास युद्ध ने गाजा के ज्यादातर हिस्सों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया. 10 अक्टूबर को अमेरिका की मध्यस्थता में गाजा में युद्धविराम हुआ था.
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