राखीगढ़ी का इतिहास
किताबों में राखीगढ़ी का जिक्र हड़प्पा संस्कृति के विस्तार के रूप में किया गया है. पिछले दो दशकों से राखीगढ़ी में पुरातत्वविदों ने जबर्दस्त काम किया है और कई ऐसी रहस्यमयी चीजों को उद्घाटित किया है जिससे इतिहास की दिशाएं बदल गई है. इस उत्खनन के आधार पर राखीगढ़ी अब हमारी प्राचीन सभ्यता के इतिहास को नई दिशा दे सकती है. अब तक माना जाता था कि सिंधु घाटी सभ्यता एक निश्चित समय में विकसित हुई, लेकिन राखीगढ़ी के नए प्रमाण इस सोच को बदल सकते हैं. इस बात के सबूत मिले हैं कि राखीगढ़ी हमारी सबसे प्राचीन संस्कृति का हिस्सा रही सरस्वती नदी के किनारे स्थित है. हालांकि सरस्वती नदीं सूख चुकी है लेकिन खुदाई में इस नदी के अवशेष मिले हैं. इसलिए अब यह तय हो चुका है कि राखीगढ़ी 7 से 8 हजार साल पहले ही संपूर्ण विकसित नगर रहा होगा. यानी यहां हड़प्पा संस्कृति से भी पहले से सभ्यता रही होगी और वह बेहद कौशलपूर्ण शहर रहा होगा.
हड़प्पा और मोहनजोदड़ों के बराबर
कुछ दशक पहले तक मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के बाद गुजरात में धौलवीरा को सबसे बड़ा शहर माना जाता था. इसके बाद राखीगढ़ी का नंबर आता था लेकिन अब यह भारत में धौलवीरा से ज्यादा बड़ा हो गया है. कई वरिष्ठ पुरातत्वविद इसे साधारण हड़प्पा स्थल नहीं, बल्कि भारत के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में से एक मानते हैं. यहां मिले अवशेष उन सवालों के जवाब दे सकते हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं हो पाया था. राखीगढ़ी का क्षेत्रफल पहले की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ा पाया गया है. यह करीब 224 हेक्टेयर में फैला है, जो इसे देश का सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल बनाता है. आकार, महत्व और स्थान की दृष्टि से यह हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के बराबर माना जा रहा है.
हकरा संस्कृति सबसे पुरानी
राखीगढ़ी में हकरा वेयर (Hakra Ware) नाम की प्राचीन मिट्टी के बर्तन संस्कृति के प्रमाण भी मिले हैं. यह संस्कृति सिंधु घाटी सभ्यता के शुरुआती दौर से भी पहले की मानी जाती है. इसके साथ ही प्रारंभिक और परिपक्व हड़प्पा काल के अवशेष भी मिले हैं. हकरा संस्कृति की मजबूत मौजूदगी एक अहम सुराग देती है कि यह संस्कृति हड़प्पाकालीन संस्कृति से भी पुरानी थी. अब हकरा लोगों को सिंधु क्षेत्र के सबसे पुराने निवासी माना जाता है. हालांकि कार्बन-14 जांच के नतीजे अभी आने बाकी हैं, लेकिन राखीगढ़ी में मिली हकरा संस्कृति की मोटी परतों के आधार पर माना जा रहा है कि यह स्थल सिंघु घाटी से पुराना है. अगर यह सही साबित होता है, तो सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास एक हजार साल या उससे ज्यादा पीछे चला जाएगा.
स्मार्ट सिटी का जन्मदाता
आज हमारे देश में स्मार्ट सिटी की चर्चा जोरों पर है लेकिन हमारी प्राचीन सभ्यता स्मार्ट सिटी का जन्मदाता थी. राखीगढ़ी उनमें से प्रमुख शहर है. हालिया खुदाई से संकेत मिले हैं कि राखीगढ़ी का नगर विकास और इंजीनियरिंग अपने समय से काफी आगे थी. यह आज के स्मार्ट सिटी मॉडल से भी बेहतर और अधिक व्यवस्थित था.
- सुनियोजित नगर –राखीगढ़ी में सड़कें सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं. जिससे रास्ते में जाम नहीं लगता था. पूरा शहर ग्रिड पैटर्न पर बसा हुआ था. घरों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों की योजना पहले से तय थी, जो आधुनिक शहरी योजना जैसी दिखती है.
- उन्नत ड्रैनेज सिस्टम-राखीगढ़ी में जो अवशेष मिले हैं उनके अनुसार हर घर से जुड़ी पक्की नालियां थीं, जो मुख्य नालियों से मिलती थीं. ये नालियां ढकी हुई थीं और नियमित सफाई के लिए निरीक्षण छेद भी बनाए गए थे. यह व्यवस्था आज की आधुनिक सीवरेज प्रणाली जैसी थी.
- मजबूत निर्माण तकनीक –पकी हुई ईंटों का समान आकार में इस्तेमाल किया गया था, जिससे इमारतें मजबूत और टिकाऊ बनती थीं. ईंटों का अनुपात तय मानकों के अनुसार था, जो उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग को दर्शाता है.
- जल प्रबंधन और संरक्षण –कुएं, जल-संग्रहण संरचनाएं और पानी के निकास की अलग व्यवस्था बताती है कि जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता था. यह आज के जल संरक्षण मॉडल जैसा है.
- सामाजिक और आर्थिक संगठन –नगर में आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों का अलग-अलग होना संकेत देता है कि वहां सुव्यवस्थित प्रशासन और सामाजिक ढांचा मौजूद था. इन सभी विशेषताओं से स्पष्ट होता है कि राखीगढ़ी केवल एक प्राचीन बस्ती नहीं थी, बल्कि एक सुव्यवस्थित, तकनीकी रूप से उन्नत और दूरदर्शी नगर था. यही कारण है कि इसे 7,000 साल पहले का स्मार्ट सिटी मॉडल कहा जा रहा है.
राखीगढ़ी का आधुनिक विकास
राखीगढ़ी में खुदाई से मिले अवशेषों के बाद अब इस पुरातत्विक स्थलों पर स्थित दो गांवों को सरकार ग्लोबल हब बनाने की तैयारी कर रही है. केंद्र सरकार ने प्राचीन हड़प्पा सभ्यता के महत्वपूर्ण स्थल राखीगढ़ी के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. यहां हड़प्पा नॉलेज सेंटर का उद्घाटन हो चुका है. इसका उद्देश्य लोगों को सिंधु-सरस्वती सभ्यता के बारे में ज्यादा जानकारी देना है. यहां विश्वस्तरीय पुरातात्विक संग्रहालय, एक विशेष शोध संस्थान, बेहतर पर्यटन सुविधाएं और मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है. राखीगढ़ी में 22 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक संग्रहालय बनाया जा चुका है. सरकार राखीगढ़ी को विश्व धरोहर सूची में शामिल करवाने के लिए भी प्रयास कर रही है, ताकि ये स्थल दुनिया भर में पहचान बना सके.
वर्तमान में क्या-क्या देखें
वर्तमान में पर्यटकों को यहां देखने के लिए बहुत कुछ है. राखीगढ़ी में स्थित हड़प्पाकालीन कई विशाल टीले (RGR-1 से RGR-7) देख सकते हैं, जहां खुदाई के दौरान प्राचीन मकान, गलियां, चूल्हे, अनाज भंडारण संरचनाएं और कार्यशालाएं मिली हैं. पर्यटक इन स्थलों को देखकर उस समय की नगर बसावट का अंदाज़ा लगा सकते हैं. यहां खुदाई में मिले पकी हुई ईंटों से बने घरों के अवशेष, सीधी सड़कों का ग्रिड पैटर्न और नालियों की व्यवस्था देखी जा सकती है, जो हड़प्पा सभ्यता की उन्नत शहरी योजना को दर्शाती है. कुछ स्थानों पर प्राचीन नालियां और जल प्रबंधन की संरचनाएं दिखाई देती हैं. इससे पता चलता है कि उस समय स्वच्छता और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता था. यहां एक कब्रिस्तान क्षेत्र भी मिला है, जहां मानव कंकाल और उनके साथ रखी गई वस्तुएं मिली हैं. इससे उस दौर की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं की जानकारी मिलती है. राखीगढ़ी में बना आधुनिक म्यूज़ियम पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है. यहां खुदाई में मिली मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन, आभूषण, औजार, मनके और अन्य प्राचीन वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं. डिजिटल डिस्प्ले और मॉडल्स के जरिए पूरी सभ्यता को समझाया जाता है. यहां एक ज्ञान केंद्र भी है, जहां सभ्यता के इतिहास, जीवनशैली और तकनीक के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है.
राखीगढ़ी कैसे जाएं
राखीगढ़ी जाने के लिए सबसे नज़दीकी बड़ा हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली है जहां से लगभग 160–180 किलोमीटर की दूरी पर राखीगढ़ी है. हिसार जंक्शन नजदीकी रेलवे स्टेशन है जहां से 40-45 किलोमीटर की दूरी पर राखीगढ़ी है. हिसार से राखीगढ़ी लगभग 65 किमी दूर है. दिल्ली से अगर आप बस से जाते हैं तो 1000 रुपये में दोनों तरफ का किराया होगा.
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