Gautam gambhir one big call changed india fate in t20 world cup: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के दौरान गौतम गंभीर का लिया गया एक फैसला टीम के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. भारतीय टीम ने संजू सैमसन की मैच जिदाऊ पारियों के दम पर लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया. ओपनिंग जोड़ी में किया गया बदलाव टूर्नामेंट में भारत की किस्मत बदलने वाला साबित हुआ.
आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद हर तरफ संजू सैमसन की चर्चा हो रही है लेकिन वो गौतम गंभीर की शुरुआती योजनाओं का हिस्सा नहीं थे. शुभमन गिल को टूर्नामेंट से ठीक पहले टीम से बाहर किया गया और वही बतौर ओपनर कोच की पहली पसंद थे.

टी20 वर्ल्ड के दौरान जिस योजना को लेकर गंभीर उतरे थे वो काम नहीं आया और उनको बीच टूर्नामेंट में बदलाव करना पड़ा. मजबूरी में लिया गया फैसला टीम इंडिया के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ और हम लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतने में कामयाब हुए.

अक्टूबर-नवंबर 2024 में कुछ ही हफ्तों में सैमसन ने बांग्लादेश के खिलाफ और मेजबान दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टी20 शतक जमाकर सनसनी मचाई थी. वह रोहित शर्मा के विकल्प के रूप में दिखे जाने लगे. इस साल की शुरुआत में इंग्लैंड के खिलाफ एक खराब सीरीज के बाद, उन्होंने प्लेइंग इलेवन में ओपनिंग की जगह खो दी. भारतीय क्रिकेट फैंस तब हैरान रह गए जब साल के अंत में एशिया कप में गिल ओपनर के तौर पर खेले और सैमसन को नंबर 5 पर भेज दिया गया.
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शुभमन गिल प्रभावित नहीं कर पाए और आखिरकार टी20 टीम से बाहर हो गए. सैमसन को फिर से ओपनिंग का मौका मिला, लेकिन तब तक उनका आत्मविश्वास कम हो चुका था. ऐसा कई खिलाड़ियों के साथ होता है. जब उन पर भरोसा नहीं किया जाता, तो उनका जोश कम हो जाता है.

टी20 वर्ल्ड कप में भी उन्होंने अपनी जगह ईशान किशन को गंवा दी. वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा भी नहीं थे. लेकिन जब सुपर 8 में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को बुरी तरह हराया और अभिषेक शर्मा पूरी तरह से आउट ऑफ फॉर्म थे. तब सैमसन को फिर से ओपनिंग के लिए टीम में लाया गया और उसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया.

भारतीय टीम को टी20 वर्ल्ड के पहले सुपर 8 मुकाबले में साउथ अफ्रीका के खिलाफ शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. नेट रन रेट प्रभावित हुआ और कोच गौतम गंभीर को अपने दो बाएं हाथ के ओपनर की योजना को बदलकर दाएं हाथ के संजू सैमसन से ओपनिंग करना पड़ा. इस एक फैसले ने पूरे टूर्नामेंट का नक्शा बदल दिया. जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने तेज 24 रन बनाए और कोच का भरोसा जीता.

इसके बाद खेले गए तीनों मैच में जो संजू सैमसन ने किया उसकी वजह से टीम इंडिया वर्ल्ड चैंपियन बनने में कामयाब हुई. वेस्टइंडीज के खिलाफ वर्चुअल क्वार्टर फाइनल, इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल और न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में उन्होंने 97*, 89 और 89 रन बनाए. सिर्फ 5 मैच खेलकर 321 रन बना डाले और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का अवार्ड ले उड़े.

अपनी आखिरी तीन पारियों में संजू सैमसन हर बार शतक बना सकते थे, लेकिन वह टीम के लिए खेल रहे थे. उनका फोकस टीम को जीत दिलाने या बड़ा स्कोर खड़ा करने पर था. वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन के बाद सेमीफाइनल और फाइनल में 89 रन के स्कोर पर बड़ा शॉट लगाने की कोशिश में विकेट गंवाया.
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