पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को टाटा स्टील के अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) संयंत्र का उद्घाटन किया। करीब 3,200 करोड़ रुपये के निवेश वाली यह इकाई पूरी तरह इस्पात कबाड़ (स्क्रैप) पर आधारित है।
मान ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल परिवेश प्रदान कर रही है।
टाटा स्टील के अनुसार, 7.5 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता वाली इस इकाई में कार्बन उत्सर्जन प्रति टन इस्पात पर 0.3 टन से भी कम होगा।
कंपनी ने लुधियाना की हाई-टेक वैली में इस संयंत्र की शुरुआत को पर्यावरण के अनुकूल इस्पात निर्माण की दिशा में मील का पत्थर बताया है।
टाटा स्टील के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि यह ईएएफ संयंत्र हरित और लचीले औद्योगिक भविष्य के प्रति टाटा समूह की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मान और चंद्रशेखरन के साथ कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन भी मौजूद थे।
नरेंद्रन ने कहा कि लुधियाना का यह संयंत्र 2045 तक नेट जीरो (शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन) का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
कम कार्बन वाले उत्पादन के लिए तैयार इस इकाई में लगभग 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।
यह संयंत्र कच्चे माल के रूप में 100 प्रतिशत इस्पात कबाड़ का उपयोग करेगा, जिसमें से 40 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा के रोहतक स्थित कंपनी के पुनर्चक्रण संयंत्र से आएगा।
यहां निर्माण क्षेत्र के लिए टाटा टिस्कॉन ब्रांड के सरियों का उत्पादन किया जाएगा, जिससे बाजार में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब हरित ऊर्जा के माध्यम से इस्पात उत्पादन शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
उन्होंने कहा कि टाटा स्टील के निवेश से हजारों परिवारों को रोजगार मिलेगा।
उन्होंने दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा को देश का बेटा बताते हुए याद किया और कहा कि टाटा समूह अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। इस अवसर पर पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा भी उपस्थित थे।
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