भारत में प्रस्तावित CAFE 3.0 नॉर्म्स को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. कार कंपनियों की लॉबिंग के बीच सरकार इन सख्त फ्यूल एफिशिएंसी और एमिशन नियमों को अप्रैल 2027 से आगे टाल सकती है. पीएमओ में लगातार बैठकें चल रही हैं और नए फ्रेमवर्क का बड़ा असर मारुति, हुंडई जैसी कंपनियों पर पड़ सकता है.
CAFE 3.0 Norms लागू होने में देरी हो सकती है.
पीएमओ ने पिछले तीन हफ्तों में इस मुद्दे पर दो बैठकें की हैं और आगे भी चर्चाएं जारी रहेंगी. इसका उद्देश्य ऐसा फॉर्मूला तैयार करना है, जो इंडस्ट्री के लिए स्वीकार्य हो और साथ ही फ्यूल एफिशियंसी व एमीशन में सुधार लाए. सोमवार को पीएमओ में हुई बैठक में पावर मिनिस्ट्री ने प्रस्तावित CAFE 3.0 नॉर्म्स पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दी. मिनिस्ट्री ने इन नियमों को जल्द अधिसूचित करने की ‘तत्काल’ जरूरत पर जोर भी दिया.
Tata Motors से ज्यादा उम्मीद
TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में पहली बार देश की टॉप फाइव कार कंपनियों के संभावित परफॉरमेंस का विस्तृत आकलन पेश किया गया. प्रस्तावित फ्रेमवर्क के आधार पर (जो जल्द पब्लिक कमेंट के लिए जारी होगा) केवल टाटा मोटर्स ही 2027-28 से 2031-32 के बीच लक्ष्य हासिल कर पाएगी. वहीं, मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर्स जैसे बड़े प्लेयर लक्ष्य से चूक सकते हैं. इससे साफ है कि नए नियम कई कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे, खासकर जो मुख्य रूप से पेट्रोल और छोटी कारों पर निर्भर हैं.
CAFE नॉर्म्स पहले से लागू
CAFE नॉर्म्स भारत में पहले से लागू हैं. CAFE 2 वर्तमान में चल रहा है, लेकिन CAFE 3.0 ज्यादा सख्त होगा. ये CO2 उत्सर्जन को और कम करने पर फोकस करेगा, जिससे कंपनियों को इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और अधिक फ्यूल-एफिशियंट इंजन वाली कारें बढ़ानी पड़ेंगी. ऑटो इंडस्ट्री पहले से ही छोटी कारों के लिए छूट, वेट-बेस्ड स्लोप और अन्य पैरामीटर्स को लेकर बंटी हुई है. कुछ कंपनियां (जैसे टाटा और महिंद्रा) सख्त नियमों का समर्थन कर रही हैं, जबकि मारुति जैसी छोटी कारों पर फोकस करने वाली कंपनियां राहत की मांग कर रही हैं.
फ्यूचर प्लान
सरकार का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करना है. लेकिन इंडस्ट्री का तर्क है कि अचानक सख्त नियमों से कारों की कीमतें बढ़ेंगी, जो खासकर मिडिल क्लास खरीदारों के लिए मुश्किल होगी. पिछले कुछ महीनों में CAFE 3.0 के ड्राफ्ट में कई बदलाव आए हैं, जैसे छोटी कारों के लिए प्रस्तावित छूट को हटाना. अब लॉबिंग के चलते समयसीमा में देरी की संभावना बढ़ गई है.
देरी में किसे फायदा?
यदि नियम टलते हैं, तो कंपनियों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि देरी से उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य प्रभावित होंगे. फिलहाल, पीएमओ स्तर पर अंतिम फैसला होना बाकी है. अधिक बैठकें होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी.
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