आजकल भागदौड़ भारी जिंदगी के कारण लोगों के पास खुद की सेहत के लिए भी समय नहीं है। ऊपर से खराब जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण बीमारियों का बुलावा दे रहे हैं। अगर आप रोजाना एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो आप सीढ़िया चढ़ सकते हैं। सीढ़ियां चढ़ना न सिर्फ एक अच्छी एक्सरसाइज है, बल्कि यह हमारे दिल और फेफड़ों के स्वास्थ्य का आईना है। कई बार होता है कि लोग सीढ़ियां चढ़ते ही बेहाल हो जाते हैं। यदि आप इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो घबराएं नहीं। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि आपकी फिटनेस और स्टैमिना को सही ट्रेनिंग और आदतों से बदला जा सकता है। आइए आपको बताते हैं सीढ़िया चढ़ते समय सांस फूलने के कारण और उपायों के बारे में जानते हैं।
सीढ़ियां चढ़ते समय सांस क्यों फूलती है?
– सीढ़ियां चढ़ने में बैठने की तुलना में 9 गुना ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है। क्योंकि इस दौरान आपके दिल और फेफड़ों को शरीर के वजन को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ऊपर ले जाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
– जब आप सीढ़ियां चढ़ते हैं तो आपके पैर की मसल्स का एक्टिव रूप से इस्तेमाल होता है, जिसके लिए ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है।
– यदि आप रेगुलर एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो स्टैमिना की कमी के कारण मामूली फिजिकल एक्टिविटी करने से भी सांस फूलने लगती हैं।
– ह्रदय रोग, फेफड़ों की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर या वातावरण में मौजूद धूल-मिट्टी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
– नाक या मुंह में किसी प्रकार की रुकावट या बहुत सारी सीढ़ियां चढ़ने का तनाव भी सांस फूलने की प्रोसेस को तेज कर देता है।
– अक्सर बहुत सारी सीढ़ियां चढ़ने का तनाव या चिंता भी सांस फूलने का कारण बन जाती है।
स्टैमिना और मजबूती बढ़ाने के उपाय
सीढ़ियां चढ़ना आसान बनाने के लिए फिटनेस विशेषज्ञ सलाह देती हैं कि शरीर के निचले हिस्से, जैसे पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूत किया जाए। इसके साथ-साथ फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि सांस फूलने की समस्या कम हो और शरीर अधिक ऊर्जा के साथ काम कर सके। नियमित व्यायाम से सहनशक्ति और संतुलन दोनों में सुधार होता है, जिससे सीढ़ियां चढ़ना सहज बन जाता है।
निचले शरीर की मजबूती
– वॉकिंग से शुरुआत: पहले दो हफ्तों तक नॉर्मल वॉक से शरीर को तैयार करें।
– इंटरवल से ट्रेनिंग: तीसरे हफ्ते से 1 मिनट चलें और इसके बाद 10 सेकंड जॉगिंग करें। इसे अगले दो हफ्तों तक दोहराएं। धीरे-धीरे जॉगिंग का समय बढ़ाकर 20 सेकंड तक ले जाएं।
– स्क्वाट्स- रोजाना 20 स्क्वाट्स से शुरुआत करें और इसे धीरे-धीरे दो महीनों में 20-20 के तीन सेट तक ले जाएं।
– सूमो स्क्वाट्स- पैर की मसल्स को मजबूती देने के लिए इन्हें भी अपने वर्कआउट में शामिल करें।
कार्डियो और एरोबिक क्षमता
– फेकड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए एरोबिक एक्सरसाइज काफी असरदार होती है।
– ब्रिस्क वॉकिंग और साइकिल चलाना।
– स्विमिंग या हाइकिंग जैसे कार्डियो एक्सरसाइज।
– जुंबा या एरोबिक्स क्लासेस।
– जिम में ट्रेडमिल या क्रॉस ट्रेनर का इस्तेमाल।
जब आपके पैर की मसल्स जितनी मजबूत होंगी, आपका कार्डियोवैस्कुलर स्टैमिना उतना ही बेहतर होगा और सीढ़ियां चढ़ना उतना ही आसान हो जाएगा।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
– अगर आप पूरी तरह से हांफने लगते हैं और सांस नॉर्मल होने में बहुत समय लगता है, तो इसे नजरअंदाज न करें।
– अगर आपकी भी यही कंडीशन में किसी कार्डियोलॉजिस्ट से मिलना जरुरी है।
– डॉक्टर आपके कुछ जरुरी टेस्ट के जरिए यह चेकअप करेंगे कि क्या आपको किसी विशेष दवा या ट्रीटमेंट की जरुरत है।
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