Govinda Maternal Uncle Best Movies : बॉलीवुड सुपर स्टार गोविंदा खबरों में छाए हुए हैं. गोविंदा के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें वो छोटे शहरों में स्टेज पर डांस करते नजर आ रहे हैं. वैसे गोविंदा को बॉलीवुड में पहला ब्रेक उनके मामा आनंद ने 1986 में ‘तन-बदन’ फिल्म से दिया था. आनंद गोविंदा की पत्नी के जीजा थे. एक तरह से देखा जाए तो सुनीता अहूजा, रिश्ते में उनकी मामी लगती थीं. आनंद ने कई फिल्मों में एक्टिंग भी की. 70-80 के दशक के दो फिल्मों में वो नजर आए थे. इन दोनों मूवी की गिनती कालजयी फिल्मों में होती है. इन फिल्मों के बिना हिंदी सिनेमा अधूरा है. जब भी इन फिल्मों को आप देखेंगे, मूड तरोताजा हो जाएगा. ये फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं……..
गोविंदा अक्सर अपने इंटरव्यू में अपने मामा का जिक्र करते रहते हैं. ये मामा कोई और नहीं बल्कि एक्टर-प्रोड्यूसर आनंद थे. आनंद का असली नाम उदय नारायण सिंह था. बनारस के रहने वाले थे. उनके बड़े भाई का नाम राजेंद्र सिंह था. दोनों ही 70 के दशक में मुंबई पहुंचे थे. आनंद ने कई फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए हैं. उनकी दो फिल्में तो कालजयी मानी जाती हैं. आज भी हर जनरेशन की पहली पसंद हैं. इन दोनों फिल्मों का निर्देशन हृषिकेश मुखर्जी ने किया था. दोनों फिल्मों की स्टोरी भी सेम थी. दोनों फिल्मों की स्टार कास्ट भी एक जैसी ही थी. ये फिल्में थीं : गोलमाल और नरम-गरम. आनंद की शादी संगीता सिंह से हुई थी. संगीता सिंह गोविंदा की पत्नी सुनीता अहूजा की बड़ी बहन थीं.

सबसे पहले बात करते हैं 20 अप्रैल 1979 को रिलीज हुई फिल्म ‘गोलमाल’ की जिसका निर्देशन हृषिकेश मुखर्जी ने किया था. ‘गोलमाल’ की गिनती बॉलीवुड की कल्ट कॉमेडी में होती है. फिल्म में अमोल पालेकर ने रामप्रसाद-लक्ष्मणप्रसाद का डबल रोल निभाया था. इस फिल्म के लिए कोई सेट नहीं बनाया गया था. फिल्म की शूटिंग उत्पल दत्त-अमोल पालेकर और डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी के घर और गार्डन में हुई थी. फिल्म में अमोल पालेकर, उत्पल दत्त, बिंदिया गोस्वामी लीड रोल में थे.

प्रोड्यूसर एनसी सिप्पी थे. फिल्म की स्टोरी शैलेष देव ने जबकि स्क्रीनप्ले सचिन भौमिक ने लिखा था. डायलॉग राही मासूम रजा के थे. आरडी बर्मन के म्यूजिक से सजी धुनों से कुल चार गाने फिल्म में रखे गए थे. फिल्म का सबसे मशहूर गाना ‘आने वाला पल, जाने वाला है’ गीतकार गुलजार ने लिखा था. फिल्म के अन्य पॉप्युलर गानों में ‘गोलमाल है भाई सब गोलमाल है’ और ‘एक बात कहूं गर मानो तुम’ शामिल हैं.
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गोलमाल फिल्म में गोविंदा के मामा भी नजर आए थे. फिल्म की शुरुआत में ही टाइटल सॉन्ग ‘सब गोलमाल है’ सुनाई देता है. इस गाने में गोविंदा के मामा आनंद नजर आते हैं. इस कालजयी गाने की एक लाइन ‘मांगे से ना मिले तो पसीना बहाइये’ आनंद पर ही फिल्मायी गई थी. गोलमाल फिल्म बंगाली मूवी ‘कांचा मीठा’ का रीमेक थी. फिल्म के संवाद-सीन्स इतने प्रभावी थे दर्शक को एक मिनट के लिए बोरियत का अहसास नहीं होता. पिछ्ले 50 साल से यह फिल्म दर्शकों को हंसा रही है. ऑल टाइम बेस्ट कॉमेडी फिल्म में शामिल है.

करीब 45 के बजट में बनी गोलमाल मूवी ने 1.6 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन करके सबको चौंका दिया था. गोलमाल 1979 की 6वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. 3 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी इस फिल्म की झोली में आए थे. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड अमोल पालेकर को, बेस्ट कॉमेडियन का फिल्मफेयर अवॉर्ड उत्पल दत्त को मिला था.

अब बात करते हैं उस क्लासिक कॉमेडी फिल्म की जिसमें आनंद ने छोटे से रोल में भी छाप छोड़ दी थी. यह फिल्म ‘नरम गरम’ थी जो कि 28 फरवरी 1981 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म का निर्देशन भी हृषिकेश मुखर्जी ने किया था. फिल्म में आमोल पालेकर, स्वरूप संपत, शत्रुघ्न सिन्हा, उत्पल दत्त और एके हंगल जैसे सितारे नजर आए थे. गोलमाल और नरम-गरम फिल्म की कहानी, किरदार, स्टार कास्ट एक जैसी थी. दोनों फिल्मों में अमोल पालेकर का नाम ‘राम प्रसाद था. उत्पल दत्त का नाम भवानी शंकर था. गोलमाल में जहां उन्हें मूंछों से प्यार था, वहीं नरम गरम में उन्हें ज्योतिष से प्यार था. फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा का एक डायलॉग ‘घोंचू’ बहुत फेमस हुआ था. उन्होंने उत्पल दत्त के छोटे भाई की भूमिका निभाई थी.

नरम गरम मूवी कॉमेडी ड्रामा फिल्म थी. इस फिल्म को गोविंदा के मामा आनंद ने सुभाष गुप्ता के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया था. म्यूजिक आरडी बर्मन का था. गीत गुलजार ने लिखे थे. फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘हमें रास्तों की जरूरत नहीं’ था जिसे आशा भोसले ने गाया था. इस फिल्म की गिनती कल्ट कॉमेडी फिल्म में होती है. फिल्म ‘हिडन जेम’ मानी जाती है. यह मूवी आज भी दिलों पर राज कर रही है.

फिल्म में गोविंदा के मामा पर एक शानदार कॉमेडी फिल्म फिल्माया गया था. यह सीन सीताहरण का था. आनंद ने लक्ष्मण का रोल निभाया था. हृषिकेश मुखर्जी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैंने बॉम्बे में 44 से ज्यादा फिल्में बनाई हैं. मैंने गोलमाल और नरम गरम एक जैसी स्टार कास्ट के साथ बनाई थी.’ नरम-गरम में कुसुम का किरदार निभाने वालीं स्वरूप संपत ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘ऋषि दा कैमरा ट्रॉली पर लगाते थे. एक ही शॉट में फिल्म को एडिट कर लेते थे. दो-तीन पेज का सीन मुझे दे दिया था. कहा था कि तुम थिएटर की हो तो इसे करो. मेरी पहली फिल्म थी. उन्होंने मुझ पर भरोसा जताया. उत्पल दत्त के साथ काम करके खूब मजा आया.’
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