एक समय ऐसा था जब सिनेमाघरों के बाहर मीलों लंबी लाइनें लगी होती थीं और गोविंदा का नाम ही हाउसफुल की गारंटी देता था. जब 1993 में ‘आंखें’ रिलीज हुई, तो इसने ₹25 करोड़ कमाकर बॉलीवुड का पूरा इक्वेशन बदल दिया, लेकिन अगर हम इस फिल्म के परफॉर्मेंस को आज के टिकट रेट और मॉडर्न बॉक्स ऑफिस स्टैंडर्ड से देखें, तो ये आंकड़े किसी चमत्कार से कम नहीं लगते. क्या गोविंदा का जादू 2026 के मार्केट में ₹1000 करोड़ का आंकड़ा पार कर पाता? आइए महंगाई और ‘चीची’ के बेमिसाल स्टारडम का इस्तेमाल करके इस दिलचस्प बॉक्स ऑफिस मैथ को एनालाइज करने की कोशिश करते हैं.
नई दिल्ली. 90 के दशक में गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी का मतलब था एंटरटेनमेंट की गारंटी और बॉक्स ऑफिस पर पैसों की बाढ़. 1993 में रिलीज हुई ‘आंखें’ ने उस समय ₹25 करोड़ कमाकर सबको हैरान कर दिया था, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर यही ‘आंखें’ 2026 में रिलीज होती, अपनी ओरिजिनल पॉपुलैरिटी और गोविंदा के ‘चमत्कारी’ दौर के साथ? महंगाई और आज के टिकट प्राइस को जोड़ लें, तो यह आंकड़ा 1000 करोड़ को पार करने का पोटेंशियल रखता है. आइए समझते हैं कि गोविंदा की यह फिल्म आज के ‘पठान’ और ‘जवान’ को कैसे कड़ी टक्कर दे सकती थी.

जब गोविंदा ने इतिहास रचा: जब 9 अप्रैल 1993 को फिल्म ‘आंखें’ थिएटर में आई, तो इसने सफलता के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. यह न सिर्फ साल की सबसे बड़ी हिट बनी, बल्कि यह दशक की सबसे यादगार कॉमेडी-एक्शन फिल्मों में से एक साबित हुई. गोविंदा के डबल रोल और चंकी पांडे के साथ उनके कोलेबोरेशन ने दर्शकों को हंसाते रखा. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उस समय एवरेज टिकट प्राइस सिर्फ 5 से 10 रुपये था, फिर भी फिल्म ने 25 करोड़ रुपये कमाए. यह उस दौर का ‘बाहुबली’ मोमेंट था.

महंगाई का गणित: अगर हम 1993 के 25 करोड़ रुपये को आज (2026) के महंगाई रेट और करेंसी वैल्यू के हिसाब से कैलकुलेट करें, तो आंकड़े हैरान करने वाले हैं. 1993 में जहां एक टिकट की कीमत 10 रुपये थी, वहीं आज एक मल्टीप्लेक्स में एवरेज टिकट की कीमत 250 से 500 रुपये है यानी सीधे 25 से 50 गुना की बढ़ोतरी. उस जमाने में करोड़ों लोगों ने थिएटर में ‘आंखें’ देखी थी. अगर आज के फुटफॉल और एवरेज टिकट प्राइस को जोड़ा जाए, तो फिल्म का एडजस्टेड कलेक्शन 800 से 1100 करोड़ रुपये के बीच है. इसका मतलब है कि 1993 में 25 करोड़ रुपये का जादू 2026 के मार्केट में 1000 करोड़ की सुनामी लाने की ताकत रखता. (महंगाई का डेटा AI का इस्तेमाल करके निकाला गया है.)
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गोविंदा का जादू: उस दौर में गोविंदा सिर्फ एक एक्टर नहीं थे, वह एक इमोशनल फिगर भी थे. उनके डांस मूव्स, कॉमिक टाइमिंग और जमीन से जुड़ा व्यवहार अब भी गायब है. 2026 में, दर्शक साफ-सुथरी कॉमेडी और मास एंटरटेनर की तरफ लौट रहे हैं. अगर गोविंदा जैसा मास सुपरस्टार ‘आंखें’ जैसी फिल्म देता, जिसमें पूरा एंटरटेनमेंट पैकेज हो-‘ओ लाल दुपट्टे वाली’ जैसे चार्टबस्टर गाने और जुड़वां भाइयों के बीच का कन्फ्यूजन, तो यह नॉर्थ इंडिया के हर स्क्रीन और शहरों के मल्टीप्लेक्स में भर जाती.

डेविड धवन और गोविंदा: आज बॉलीवुड ‘यूनिवर्स’ और ‘डार्क थ्रिलर’ के पीछे भाग रहा है. लेकिन 1993 में डेविड धवन ने ‘आंखें’ के साथ दिखाया कि बिना बड़े बजट या अनोखी लोकेशन के ब्लॉकबस्टर कैसे बनाई जाती है. अगर यह फिल्म 2026 में भी उसी एनर्जी के साथ दिखाई जाती, तो यह आज की मल्टी-बिलियन डॉलर फिल्मों को पीछे छोड़ देती.

आज के समय में, ‘गदर 2’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों की सफलता ने साबित कर दिया है कि ‘देसी तड़का’ और ‘पुरानी यादों’ का मेल क्या कर सकता है? ‘आंखें’ में सब कुछ था-एक्शन, सस्पेंस, कॉमेडी और बंदर (बजरंगी) का मजेदार किरदार. 2026 के डिजिटल जमाने में जहां मीम्स और रील्स का बोलबाला है, गोविंदा के एक्सप्रेशन और फिल्म के मजेदार सीन का वायरल होना पक्का था. यह फिल्म न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में ‘देसी एंटरटेनमेंट’ को आगे बढ़ाती.

महंगाई को देखते हुए ‘आंखें’ आज की ‘केजीएफ’, ‘पठान’ या ‘जवान’ जैसी होती. गोविंदा का जमाना एक कमाल था जिसे दोहराना मुश्किल होगा. अगर गोविंदा 2026 में भी अपने उसी फॉर्म में होते और ‘आंखें’ रिलीज होती, तो 1000 करोड़ का आंकड़ा शायद बस शुरुआत होती. इस फिल्म ने साबित कर दिया कि सुपरस्टार अपने लुक से नहीं, बल्कि दर्शकों के दिलों से बनते हैं.
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