बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी), जिसने आम चुनावों में व्यापक जीत हासिल की, ने शुक्रवार को अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मुकदमे का सामना करने के लिए भारत से प्रत्यर्पित करने की अपनी मांग को दोहराया। बीएनपी की शानदार जीत के तुरंत बाद, पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि उनकी पार्टी औपचारिक रूप से भारत से हसीना को मुकदमे के लिए बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने का आग्रह करेगी। वरिष्ठ बीएनपी नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि विदेश मंत्री पहले ही उनके प्रत्यर्पण का मामला उठा चुके हैं और हम इसका समर्थन करते हैं। हमने लगातार कानून के अनुसार उनके प्रत्यर्पण की मांग की है। यह दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों का मामला है। हमने भारत सरकार से भी आग्रह किया है कि उन्हें बांग्लादेश वापस भेजकर वहां मुकदमे का सामना कराया जाए।
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अहमद ने कहा कि बांग्लादेश भारत समेत सभी पड़ोसी देशों के साथ सामान्य संबंध चाहता है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संबंध समानता पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा हम भारत समेत सभी देशों के साथ आपसी सम्मान और समानता पर आधारित मैत्रीपूर्ण संबंध चाहते हैं। यह घटना 12 फरवरी को हसीना की उस टिप्पणी के बाद सामने आई है जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में हुए चुनावों को “ढोंग” बताया था।
हसीना के प्रत्यर्पण पर भारत का रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नवंबर में कहा कि हमें अनुरोध प्राप्त हुआ है और चल रही न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इसकी जांच की जा रही है। ढाका ने मांग की है कि नई दिल्ली द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत हसीना को बांग्लादेश को सौंप दे। जवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम बांग्लादेश की जनता के सर्वोत्तम हितों और वहां शांति, लोकतंत्र, समावेश और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस संबंध में सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से बातचीत जारी रखेंगे।
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