अक्सर लोग आर्ट्स को ‘कमजोर’ छात्रों का विषय मानते हैं, जो एक बड़ी गलतफहमी है। लेकिन, भारत की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं (UPSC, State PCS) के टॉपर्स में सबसे बड़ी संख्या आर्ट्स बैकग्राउंड वालों की होती है। हालांकि इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र जैसे विषय ही प्रतियोगी परीक्षाओं के ‘सामान्य अध्ययन’ (General Studies) का 70-80% हिस्सा होते हैं।
इसके अलावा आर्ट्स की पढ़ाई के साथ-साथ छात्र कोचिंग या सेल्फ स्टडी के लिए ज्यादा समय निकाल पाते हैं। इसके छात्र अपनी जनरल नॉलेज के दम पर अच्छी पकड़ बना लेते हैं। यह उन विद्यार्थियों के लिए बेस्ट है, जो IAS, IPS, या राज्य प्रशासनिक अधिकारी बनने का लक्ष्य रखते हैं।
यदि आपको आंकड़ों और पैसों के प्रबंधन में रुचि है, तो कॉमर्स आपके लिए बेहतरीन सरकारी अवसर खोलता है। IBPS PO, Clerk और RBI ग्रेड-B जैसी नौकरियों में कॉमर्स के छात्रों को ‘अकाउंटेंसी’ और ‘इकोनॉमिक्स’ का अतिरिक्त लाभ मिलता है।
इसके अलावा कैग (CAG) में ऑडिटर या इनकम टैक्स विभाग में सांख्यिकीय पदों के लिए कॉमर्स बैकग्राउंड जरूरी है। कई सरकारी कंपनियां (जैसे ONGC, गेल) अकाउंट्स ऑफिसर के पदों पर केवल कॉमर्स प्रोफेशनल्स को ही लेती हैं। ऐसे में जो छात्र बैंकिंग या वित्त मंत्रालय जैसे विभागों में विशेषज्ञ के तौर पर काम करना चाहते हैं, उन्हें कॉमर्स स्ट्रीम ही लेना चाहिए।
खास है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए स्ट्रीम से ज्यादा आपकी निरंतरता (Consistency) और रणनीति मायने रखती है। अगर आप 10वीं के बाद ही अपना लक्ष्य तय कर लेते हैं, तो आप उन 90% छात्रों से आगे निकल जाते हैं जो बिना सोचे-समझे भीड़ का हिस्सा बनते हैं, और बाद में पछताते रहते हैं।
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