बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को संसदीय चुनाव हुए, जो 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहला बड़ा राष्ट्रीय चुनाव था. यह चुनाव अवामी लीग (शेख हसीना की पार्टी) के बैन होने के बाद हुआ और मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के बाद लोकतंत्र की वापसी का पहला टेस्ट था. चुनाव में मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-पार्टी गठबंधन (जिसमें नेशनल सिटिजन पार्टी या NCP शामिल थी) के बीच था. यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में ऐतिहासिक था क्योंकि यहां पहली बार GenZ आंदोलन के बाद नई ताकतें उभरीं, लेकिन परिणाम पुरानी राजनीति की वापसी दिखाते हैं. जमात का 15 साल पुराना वर्चस्व खत्म हो गया.
BNP की शानदार वापसी और बहुमत हासिल करना
तारिक रहमान की पार्टी ने 20 साल बाद सत्ता में वापसी की, जिसकी वजह हैं तारिक रहमान. वे 17 साल से लंदन में निर्वासन पर थे और मां खालदा जिया के निधन के बाद दिसंबर 2025 में ढाका वापस आए थे. चुनाव में BNP और उनके सहयोगियों ने 299 सीटों में से 216 सीटें जीतीं हैं. यह दो-तिहाई बहुमत से ज्यादा है, जो संवैधानिक बदलावों को आसानी से पास करने की ताकत देता है. तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से जीत हासिल की और अब प्रधानमंत्री बनने की ओर हैं.
BNP ने चुनाव में नौकरियां, अर्थव्यवस्था सुधार, भ्रष्टाचार खत्म करने और किसानों-युवाओं पर फोकस किया. पार्टी ने जीत के बाद संयम बरता यानी कोई जश्न नहीं मनाया, बल्कि मस्जिदों, मंदिरों, चर्चों में प्रार्थना का आह्वान किया. अवामी लीग के कई पुराने मतदाता BNP की ओर चले गए, क्योंकि वे स्थिरता चाहते थे. यह 2001 के बाद BNP का सबसे बड़ा प्रदर्शन है.
जमात-ए-इस्लामी की उम्मीदों से बहुत पीछे रहना
कट्टर इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने 2025 में सुप्रीम कोर्ट से बैन हटवाने के बाद मजबूत वापसी की कोशिश की. यह 11-पार्टी गठबंधन का लीडर था, जिसमें NCP भी शामिल थी. पार्टी ने महिलाओं-अल्पसंख्यकों को साथ लेने, न्याय-आधारित शासन और ‘सभी को साथ लेकर नया बांग्लादेश’ का नारा दिया. पहली बार हिंदू उम्मीदवार भी उतारा. लेकिन अच्छे नहीं रहे. जमात और उसके गठबंधन ने सिर्फ 69-77 सीटें जीतीं. यह पार्टी की उम्मीदों से बहुत कम था, हालांकि यह अब मुख्य विपक्षी दल बनेगी. 1971 युद्ध में भूमिका, महिलाओं के अधिकारों पर विरोध, छात्र विंग छत्र शिबिर से जुड़ी हिंसा जैसे पुराने आरोप और वित्तीय मुद्दों ने मतदाताओं को प्रभावित किया. युवा, महिलाएं और अल्पसंख्यक ज्यादातर BNP की ओर चले गए. जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने हार मानी लेकिन प्रक्रिया पर कुछ असंतोष जताया.
छात्र-युवा ब्लॉक (NCP) का बड़ा पतन और चुनावी असफलता
2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन ने शेख हसीना को गद्दी से हटा दिया था. इसमें सैकड़ों लोगों की मौतें हुईं और इस आंदोलन का लीडर कहलाई नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP). इसने चुनाव में जमात के साथ गठबंधन कर लिया. NCP के लीडर नाहिद इस्लाम जैसे युवा थे, जो नई राजनीति, सुधार और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का वादा करते थे. लेकिन नतीजे पलट गए और NCP को सिर्फ 5-6 सीटें मिलीं. यह 2024 के GenZ आंदोलन के लिए बड़ा झटका था. इसकी कई बड़ी वजहें सामने आईं, जैसे संगठन की कमी, BNP की मजबूत ग्रासरूट मशीनरी से मुकाबला न कर पाना और युवा मतदाताओं का BNP की ओर जाना. NCP ने जमात से गठबंधन किया, लेकिन इससे युवा और उदारवादी मतदाता दूर हो गए.
कुल मिलाकर चुनाव पर क्या फर्क पड़ा और आगे क्या होगा?
यह चुनाव बांग्लादेश में पुरानी राजनीतिक पार्टी BNP की वापसी दिखाता है, जबकि छात्र ब्लॉक जैसी नई ताकतें और जमात की उम्मीदों को तोड़ दिया है. मतदाताओं ने संवैधानिक सुधारों को भी हां कहा है. BNP की सरकार बनने के बाद स्थिरता आएगी, लेकिन जमात विपक्ष में रहेगी. यानी यह परिवर्तन बांग्लादेश को लोकतंत्र की नई राह पर ले जा रहा है.
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