उधर, तलाशी अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि असम पुलिस दिल्ली क्यों गई? उन्होंने यह भी दावा किया कि पवन खेड़ा पहले ही हैदराबाद चले गए हैं। गुवाहाटी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कांग्रेस नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि कुछ दिनों में सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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उधर, मुख्यमंत्री की पत्नी रिनकी भुइयां सरमा ने पुष्टि की कि उन्होंने ही प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि विपक्ष निराशा में इस तरह के आरोप लगा रहा है और एक तरह की रणनीति बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय होना चाहिए और सच सामने आना चाहिए।
हम आपको यह भी बता दें कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने परिवार को दुबई में संपत्ति से जोड़ने वाले आरोपों को भी खारिज किया। उनका कहना है कि कांग्रेस द्वारा दिखाए गए दस्तावेज एक दस्तावेज साझा करने वाले मंच से बिना अनुमति लिए गए हैं और उनकी विश्वसनीयता संदिग्ध है। विवाद को और बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं गौरव गोगोई और पवन खेड़ा पर पाकिस्तान से जुड़े होने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया मंच की मदद क्यों ली गई। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले को अदालत तक ले जाएंगे।
हम आपको बता दें कि यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं और प्रचार अभियान अपने अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में उनकी पार्टी की स्थिति मजबूत है और विपक्ष कमजोर हो चुका है।
इस बीच, कांग्रेस ने दावा किया कि असम पुलिस के अधिकारी पार्टी नेता पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुंचे हैं जो इस बात का सबूत है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा हताश और परेशान हैं क्योंकि विधानसभा चुनाव में उनकी हार तय नजर आ रही है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए राज्य मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘जनहित में बुनियादी सवाल पूछने पर मेरे सहयोगी पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधिकारियों की पूरी फौज की तैनाती यह साबित करती है कि असम के मुख्यमंत्री हताश और परेशान हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह उचित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह प्रतिशोध की कार्रवाई है, एक ऐसे मुखर विपक्ष की आवाज को दबाने और चुप कराने के लिए राज्य मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है, जो सरकार के कई कारनामों को उजागर कर रहा है। जो डराते हैं वे डरे हुए होते हैं और उनके पास छिपाने के लिए बहुत कुछ होता है।’’ रमेश ने दावा किया कि इससे यह भी साबित होता है कि मुख्यमंत्री को आसन्न हार का सामना करना पड़ रहा है।
बहरहाल, असम का यह पासपोर्ट विवाद अब केवल आरोप और प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कानूनी और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं के आरोप भी जुड़ गए हैं। चुनाव से ठीक पहले यह मामला राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
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