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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ वायरल वीडियो पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। वीडियो में सीएम को एक खास समुदाय के सदस्यों पर राइफल से निशाना साधते और फायरिंग करते हुए दिखाया गया था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने पिटीशनर्स से गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने को कहा। हालांकि कोर्ट ने कहा कि चुनावों से पहले ऐसे कई मामले सामने आते हैं। यह एक ट्रेंड बनता जा रहा है।
असम में आने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि समस्या यह है कि चुनाव का एक हिस्सा उससे पहले लड़ा जाता है।

कांग्रेस ने सबसे पहले उठाया था वीडियो का मुद्दा
दरअसल, 8 जनवरी को कांग्रेस ने दावा किया कि असम बीजेपी X हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा मुसलमानों को गोली मारते दिख रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि ये वीडियो अल्पसंख्यकों की टार्गेटेड पॉइंट-ब्लैंक हत्या को बढ़ावा देने जैसा है। कांग्रेस का दावा है कि वीडियो डिलीट कर दिया गया है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के X हैंडल पर दिख रहे वीडियो में नजर आ रहा है कि असम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कथित तौर पर एक राइफल से निशाना साधते और दो लोगों पर गोली चलाते हुए दिख रहे थे। निशाने में दिख रही तस्वीर में एक ने टोपी पहनी थी और दूसरे की दाढ़ी थी। इसका कैप्शन पॉइंट-ब्लैंक शॉट था।
श्रीनेत के शेयर किए गए वीडियो में असम की भारतीय जनता पार्टी का X अकाउंट नजर आ रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने लिखा- यही है असली बीजेपी: सामूहिक हत्यारे। यह जहर, नफरत और हिंसा आप पर है, मिस्टर मोदी। उन्होंने पूछा कि क्या अदालतें और अन्य संस्थाएं सो रही हैं?
कांग्रेस महासचिव बोले थे- यह नरसंहार का आह्वान
वीडियो वायरल होने के बाद संगठन के प्रभारी कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर बीजेपी की आलोचना की थी। वेणुगोपाल ने X पर कहा था- एक आधिकारिक बीजेपी हैंडल ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें अल्पसंख्यकों की टारगेटेड, पॉइंट-ब्लैंक हत्या दिखाई गई है।
उन्होंने कहा कि यह नरसंहार का आह्वान करने के अलावा और कुछ नहीं है। एक ऐसा सपना जिसे यह फासीवादी शासन दशकों से पाले हुए है।

हिमंत के मियां मुसलमान बयान पर भी हो चुका है विवाद
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 27 जनवरी को कहा था कि राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 4 से 5 लाख मिया मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे।
उन्होंने कहा था कि हिमंत बिस्व सरमा और भाजपा सीधे तौर पर मिया समुदाय के खिलाफ हैं। उन्होंने लोगों से मिया समुदाय को परेशान करने की अपील की। उनका कहना था कि जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे।
मिया बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक अपमानजनक शब्द है। असम सीएम के मुताबिक वे मूल निवासियों के संसाधनों, नौकरियों और जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।
तिनसुकिया जिले के डिगबोई में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से सरमा ने कहा वोट चोरी का मतलब यह है कि हम कुछ मिया वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं। आदर्श रूप से उन्हें असम में वोट डालने की अनुमति नहीं होनी चाहिए, बल्कि बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। सीएम ने कहा, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न कर सकें।

सरमा ने कहा था- अगर वो 5 रुपए मांगे तो 4 रुपए दो
हिमंत बिस्व सरमा ने आगे कहा था कि जो कोई भी किसी भी तरह से मिया को परेशानी दे सकता है, वह दे। आप भी इसमें शामिल हैं। रिक्शा में अगर किराया 5 रुपये है, तो उन्हें 4 रुपये दीजिए। जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे।
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