14 दिन की ट्रेनिंग, साल भर की कमाई
अमेठी स्थित RSETI (आरसेटी) संस्थान बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए 14 दिनों का निशुल्क प्रैक्टिकल प्रशिक्षण चला रहा है. इस ट्रेनिंग में आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने से लेकर उसे बाजार में बेचने तक की पूरी जानकारी दी जाती है. प्रशिक्षण के बाद कोई भी व्यक्ति कुशल कारीगर होने के साथ-साथ एक सफल बिजनेसमैन भी बन सकता है.
क्या सिखाया जाता है ट्रेनिंग में
आरसेटी के मैनेजर और बिजनेस एक्सपर्ट प्रकाश जायसवाल बताते हैं कि यह एक प्रोडक्ट बेस्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम है. इसमें कच्चे माल और धागों की मदद से हार, झुमके, कंगन और अन्य आकर्षक ज्वेलरी डिजाइन करना सिखाया जाता है. उन्होंने बताया कि इस बिजनेस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मुनाफा लागत से दोगुना से भी ज्यादा होता है.
100–150 रुपये लागत, 300–400 में बिक्री
आर्टिफिशियल ज्वेलरी के एक प्रोडक्ट को तैयार करने में लगभग 100 से 150 रुपये का खर्च आता है. वहीं ज्वेलरी बाजार में 300 से 400 रुपये तक आसानी से बिक जाती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में इस काम से लाखों रुपये की कमाई संभव है. यही वजह है कि यह व्यवसाय पूरे साल चलने वाला माना जाता है.
सरकारी योजना से मिलता है आर्थिक सहारा
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी की चिंता भी नहीं करनी पड़ती. प्रकाश जायसवाल के अनुसार, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत इस काम के लिए अनुदान और सब्सिडी की सुविधा उपलब्ध है. इससे युवा और महिलाएं आसानी से अपना स्टार्टअप शुरू कर सकती हैं.
महिलाओं की सफलता की कहानी
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी रूपा देवी, संगीता पांडे और प्रतिभा शुक्ला जैसी महिलाएं इस व्यवसाय की मिसाल हैं. रूपा देवी बताती हैं कि उन्होंने करीब दो साल पहले आर्टिफिशियल ज्वेलरी का काम शुरू किया था. आज उन्हें इससे नियमित और अच्छी आमदनी हो रही है. उनका कहना है कि यह ऐसा व्यवसाय है, जो साल भर चलता है और इसमें किसी तरह की बड़ी परेशानी नहीं आती.
आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा मौका
कम लागत, कम समय की ट्रेनिंग और सरकारी सहयोग इन तीनों कारणों से आर्टिफिशियल ज्वेलरी का व्यवसाय आज ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है.
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.