My AI को भी पैरेंट्स लिमिट या ब्लॉक कर सकते हैं. फिर भी, ये दावे कई रिपोर्ट्स और कानूनी मामलों से टकराते हैं, जहां Snapchat को बच्चों के लिए खतरनाक माना जा रहा है. सबसे बड़ा रिस्क My AI चैटबॉट से जुड़ा है. टेस्ट्स में यह नाबालिग यूजर्स को अनुचित सलाह दे चुका है.
इस मुद्दे पर विस्तार से बात की और बताया कि उनकी प्लेटफॉर्म कैसे बच्चों को सुरक्षित रखने की दिशा में काम करती है. उथारा ने जोर देकर कहा कि Snapchat को पारंपरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अलग समझना चाहिए. जहां कई ऐप्स ‘टाउन स्क्वेयर’ की तरह खुले पब्लिक फीड पर आधारित होते हैं, Snapchat मूल रूप से वन-टू-वन चैटिंग पर फोकस करता है.
इससे अजनबियों से अनचाहे संपर्क कम होते हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारे प्लेटफॉर्म की संरचना ही ऐसी है कि स्ट्रेंजर्स से इंटरैक्शन को न्यूनतम रखा जाता है, जो बच्चों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच बनता है.’ Snapchat कई सुरक्षा फीचर्स को डिफॉल्ट रूप से चालू रखता है, ताकि यूजर्स को अलग से सेटिंग्स बदलने की जरूरत न पड़े.
इनमें लोकेशन शेयरिंग को प्राइवेट रखना, मैसेजेस का ऑटोमैटिक डिसअपीयर होना और यूजर्स को चैट कंट्रोल करने की सुविधा शामिल है. इससे बातचीत निजी रहती है और पुरानी चैट्स को अनचाहे लोगों तक पहुंचने से रोका जा सकता है.एक खास बात Parental Controls की है.
फैमिली सेंटर फीचर पर जोर
Snapchat का Family Center फीचर माता-पिता को उनके टीनएजर्स की एक्टिविटी मॉनिटर करने की सुविधा देता है. इससे पैरेंट्स देख सकते हैं कि उनके बच्चे किससे बात कर रहे हैं, कितना समय ऐप पर बिता रहे हैं और नए फ्रेंड्स कौन जोड़ रहे हैं. उथारा ने जोर दिया कि ये टूल्स पारदर्शी और ट्रस्ट-बेस्ड हैं, जो पैरेंट्स और बच्चों के बीच संतुलित रिश्ता बनाए रखते हैं.
इसके अलावा, Snapchat में एक इंटीग्रेटेड AI चैटबॉट भी है, जिसे ‘My AI’ कहा जाता है. यह फीचर यूजर्स को मददगार इंटरैक्शन देता है, लेकिन पैरेंट्स इसे कंट्रोल कर सकते हैं, जैसे इसे ब्लॉक या लिमिट करना. यह दिखाता है कि AI को कैसे सुरक्षित और उपयोगी बनाया जा सकता है, बिना बच्चों को जोखिम में डाले.
पैनल में LEGO Education, Cyber Saathi और अन्य संगठनों के एक्सपर्ट्स भी शामिल थे, जिन्होंने बच्चों के प्रोफाइलिंग पर जीरो टॉलरेंस, एथिकल AI डिजाइन और चाइल्ड-सेंट्रिक पॉलिसी की मांग की. Snapchat का यह बयान बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है. समिट में यह सेशन साफ संकेत दे रहा है कि AI के युग में बच्चों की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है.
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