1 मार्च से भारत में WhatsApp, Telegram, Signal समेत मैसेजिंग ऐप्स पर SIM-बाइंडिंग नियम लागू, SIM हटते ही ऐप बंद. सरकार ने डिजिटल सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है.
1 मार्च से नया नियम लागू.
दूरसंचार विभाग (DoT) ने ऑफिशियल तौर पर वॉट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, Arattai और Josh सहित कई ऐप कंपनियों को निर्देश दिया है कि उनकी सेवाएं केवल उसी स्थिति में काम करें जब रजिस्टर्ड SIM कार्ड संबंधित मोबाइल डिवाइस में मौजूद और सक्रिय हो.
ये आदेश टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी (TCS) Rules, 2024 के तहत जारी किया गया है. कंपेनियों को 90 दिनों की समय-सीमा दी गई थी, जो 28 फरवरी को समाप्त हो रही है, और आज यानी 1 मार्च से ये नया नियम लागू हो जाएगा. सरकार का कहना है कि यह कदम SIM-स्वैप स्कैम, फर्जी पहचान और ऑनलाइन ठगी जैसी बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है.
क्या बदलेगा आज (1 मार्च) से?
- अगर रजिस्टर्ड SIM मोबाइल से हटाया गया, बदला गया या डीएक्टिव हुआ, तो संबंधित ऐप उस डिवाइस पर काम करना बंद कर देगा.
- सही SIM दोबारा डालकर ऑथेंटिकेशन करने पर ही सर्विस दोबारा शुरू होगी.
- वॉट्सऐप वेब और टेलीग्राम जैसे वेब/डेस्कटॉप वर्जन हर 6 घंटे में ऑटो लॉगआउट होंगे.
- दोबारा लॉगइन के लिए फोन से QR कोड स्कैन करना होगा, जिसमें एक्टिव SIM मौजूद हो.
सरकार का मकसद क्या है?
सरकार के मुताबिक, ये व्यवस्था यूजर्स की पहचान को मजबूत बनाने और मैसेजिंग ऐप्स की ट्रेसबिलिटी बढ़ाने के लिए लागू की जा रही है. संचार मंत्री Jyotiraditya Scindia ने साफ किया है कि डेडलाइन आगे नहीं बढ़ाई जाएगी और डिजिटल सुरक्षा के लिए यह जरूरी कदम है.
इंडस्ट्री की चिंता
इंडस्ट्री संगठनों ने आशंका जताई है कि इससे उन यूजर्स को असुविधा हो सकती है जो मल्टी-डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं या बार-बार यात्रा करते हैं. हालांकि सरकार का मानना है कि सुरक्षा को प्राथमिकता देना समय की जरूरत है और यह नियम साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा.
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Afreen Afaq has started her career with Network 18 as a Tech Journalist, and has more than six years experience in ‘Mobile-Technology’ beat. She is a high-performing professional with an established and proven …और पढ़ें
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