वैज्ञानिक भाषा में इसे एनुलर सोलर एक्लिप्स (Annular Solar Eclipse) कहा जाता है. इस दौरान चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे दूर होता है, जिसके कारण उसका आकार आसमान में थोड़ा छोटा दिखाई देता है. 17 फरवरी को होने वाले इस ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के लगभग 96% हिस्से को कवर कर लेगा. यह नजारा लगभग 616 किलोमीटर चौड़े रास्ते में दिखाई देगा, जहां सूरज का केवल बाहरी किनारा ही चमकता हुआ नजर आएगा.
भारत के समय के अनुसार ग्रहण का शेड्यूल
भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार, यह ग्रहण 17 फरवरी की दोपहर को शुरू होगा. चूंकि यह घटना मुख्य रूप से अंटार्कटिका और दक्षिणी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में केंद्रित है, इसलिए भारत में इसका समय इस प्रकार रहेगा:
आंशिक ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 3:26 बजे (IST) से अंटार्कटिका और दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आंशिक ग्रहण शुरू होगा.
वलयाकार चरण (Ring of Fire) की शुरुआत: शाम 5:12 बजे (IST) से मुख्य रिंग ऑफ फायर का नजारा शुरू होगा.
अधिकतम ग्रहण: शाम 6:11 बजे (IST) के आसपास रिंग ऑफ फायर अपने चरम पर होगा.
ग्रहण की समाप्ति: रात 7:57 बजे (IST) पर यह खगोलीय घटना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी.
क्या भारत में दिखाई देगा यह ग्रहण?
भारतीय स्काईवॉचर्स के लिए थोड़ी निराशाजनक खबर है. यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसका रास्ता अंटार्कटिका के अंदरूनी और निर्जन इलाकों से होकर गुजर रहा है. भारत के अलावा अमेरिका और यूरोप के अधिकांश देशों में भी इसे नहीं देखा जा सकेगा. अफ्रीका के कुछ देशों जैसे मोजाम्बिक, मेडागास्कर और मॉरीशस में लोग 10% से 35% तक आंशिक सूर्य ग्रहण देख पाएंगे.
अंटार्कटिका के वैज्ञानिकों के लिए सुनहरा मौका
एक्लिप्स मीटियोरोलॉजिस्ट जे एंडरसन के अनुसार, इस ग्रहण को साक्षात देखने वाले लोगों की संख्या बहुत कम होगी. अंटार्कटिका के जिस हिस्से में ‘रिंग ऑफ फायर’ दिखेगा, वहां पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है. केवल दो रिसर्च स्टेशन, रूस का ‘मिर्नी’ और फ्रांस-इटली का ‘कॉनकॉर्डिया’, इसके रास्ते में आते हैं. मिर्नी स्टेशन पर यह नजारा 1 मिनट 52 सेकंड तक दिखेगा, जबकि कॉनकॉर्डिया में यह 2 मिनट 9 सेकंड तक बना रहेगा. यहां रहने वाले कुछ दर्जन शोधकर्ता ही इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे.
ग्रहणों का जोड़ा और भविष्य की घटनाएं
खगोल विज्ञान के अनुसार, ग्रहण हमेशा जोड़ों में आते हैं. 17 फरवरी के सूर्य ग्रहण के ठीक बाद, अगली पूर्णिमा यानी 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा. वह चंद्र ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. वहीं, अगला वलयाकार सूर्य ग्रहण 6 फरवरी 2027 को लगेगा, जो चिली, अर्जेंटीना और अफ्रीका के कई देशों में देखा जा सकेगा.
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