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बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा SBI के फ़ैसले को सही ठहराए जाने के बाद, अंबानी ने दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। इस दिग्गज उद्योगपति ने दावा किया कि कुछ दस्तावेज़, जिनके आधार पर खातों को धोखाधड़ी की श्रेणी में डालने के आदेश दिए गए थे, उन्हें शुरू में नहीं दिए गए थे और छह महीने बाद ही उपलब्ध कराए गए।
रिलायंस कम्युनिकेशंस, जो कभी एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी थी, बढ़ते कर्ज़ और कामकाज से जुड़ी चुनौतियों के कारण अब दिवालियापन की प्रक्रिया से गुज़र रही है।
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कानूनी मुश्किलें
पिछले हफ़्ते, अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी से CBI ने दो दिनों तक पूछताछ की। यह पूछताछ रिलायंस होम फ़ाइनेंस लिमिटेड से जुड़े 228 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में की गई थी। एजेंसी ने उनसे एक कथित बैंक धोखाधड़ी मामले के संबंध में पूछताछ की, जिसमें उनके साथ RHFL के पूर्व CEO और पूर्व पूर्णकालिक निदेशक, रविंद्र सुधाकर, और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया है।
यह आपराधिक मामला RHFL — जो रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप की एक कंपनी है — उसके प्रमोटरों या निदेशकों, और कुछ अज्ञात बैंक अधिकारियों के ख़िलाफ़ यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार का आरोप लगाया गया था, जिससे यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (पूर्व-आंध्रा बैंक) को 228 करोड़ रुपये का ग़लत तरीक़े से नुकसान हुआ।
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