गालिबाफ ने इस्लामाबाद पहुंचने के बाद एक्स पर एक फोटो शेयर की। इसमें विमान की सीटों पर चार बच्चों की तस्वीरें रखी हैं, जिनके साथ उनके खून से सने स्कूल बैग और जूते रखे हैं और फूल भी रखा है। ईरानी शहर मिनाब में जंग के पहले ही दिन 28 फरवरी को एक प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ था, जिसमें 168 लोगों की मौत हुई थी। इनमें बच्चे और स्कूल का स्टाफ भी शामिल था। इस हमले का आरोप अमेरिका और इजराइल पर लगाया गया था। अमेरिका ने कहा कि वे इस हमले की जांच कर रहे हैं। बाद में ईरान ने अमेरिकी नौसेना के दो कर्मियों यूएसएस स्प्राउंस के कमांडर ली आर. टेट और कार्यकारी अधिकारी जेफरी ई. यॉर्क – की तस्वीरें भी जारी कीं, जिनके बारे में उसका दावा था कि उन्होंने हमले को अधिकृत किया था। ईरान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाया है, जिसने अमेरिका से अपनी जांच पूरी करने और हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करके पीड़ितों को न्याय दिलाने का आग्रह किया है।
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पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता
पाकिस्तान में हो रही अमेरिका-ईरान वार्ता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ग़ालिबफ़ कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री अब्बास अराकची, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के पूर्व कमांडर मोहम्मद बगेर ज़ोलग़द्र, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेराती और अन्य अधिकारी शामिल हैं। दुनिया वार्ता के नतीजों का इंतज़ार कर रही है, वहीं ईरान ने संकेत दिया है कि वह वार्ता को लेकर सतर्क है और कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत में उसे केवल “टूटे वादे” ही मिले हैं। इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि हमारी मंशा अच्छी है, लेकिन हमें भरोसा नहीं है… अमेरिकियों के साथ बातचीत का हमारा अनुभव हमेशा असफलता और टूटे वादों से भरा रहा है। ईरान लेबनान में युद्धविराम चाहता है और युद्धविराम समझौते के तहत अपनी संपत्तियों को मुक्त कराना चाहता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह समझौते से पीछे हट सकता है। हालांकि, अमेरिका ने ईरान से कहा है कि वह उसके साथ ‘खेल’ न खेले और मध्य पूर्व के इस देश पर नए हमले करने की धमकी दी है।
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