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सूत्रों के अनुसार, यूएई ने यह राशि पाकिस्तान को भुगतान संतुलन के समर्थन के लिए प्रदान की थी और यह हाल तक आगे बढ़ाई जा रही थी।
यूएई ने हाल ही में पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका-इजराइल के ईरान के साथ युद्ध के मद्देनजर यह पैसा तुरंत वापस मांगा है।
जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह राशि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास सुरक्षित जमा के तौर पर रखी गई थी। पाकिस्तान यह रकम इस महीने के अंत तक यूएई को लौटा देगा।
पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव
पाकिस्तान के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। 2 अरब डॉलर की इस निकासी से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट आ सकती है।
मुद्रा का अवमूल्यन: विदेशी मुद्रा भंडार घटने से पाकिस्तानी रुपया और कमजोर हो सकता है।
महंगाई: डॉलर की कमी से आयात महंगा होगा, जिससे जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा।
IMF की शर्तें: पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से नए राहत पैकेज की उम्मीद कर रहा है, और भंडार में कमी उसकी साख पर असर डाल सकती है।
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पाकिस्तान ने इस महीने के अंत तक कर्ज चुकाने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन सवाल यह है कि वह इस भारी वित्तीय अंतर को कैसे भरेगा। पश्चिम एशिया के युद्ध ने न केवल मानवीय संकट पैदा किया है, बल्कि पाकिस्तान जैसे कर्ज पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी ‘खतरे की घंटी’ बजा दी है।
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