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BEL Bengaluru: भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के परिसर में एक अत्याधुनिक मिसाइल एकीकरण सुविधा (Missile Integration Facility) का उद्घाटन किया है. यह सुविधा न केवल भारत की मारक क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि स्वदेशी मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित होगी.
आकास का शिकारी दुश्मनों पर काल बनकर बरसेगा. (एआई इमेज)
बेंगलुरु की इस नई फैसिलिटी में मुख्य रूप से आकाश मिसाइल सिस्टम की तीसरी और चौथी रेजिमेंट के कॉम्बैट सिस्टम तैयार किए जाएंगे. इसके साथ ही, यहां माउंटेन फायर कंट्रोल रडार का निर्माण भी होगा, जो हिमालय जैसी दुर्गम चोटियों पर तैनात होकर दुश्मन की हर हरकत पर पैनी नजर रखेगा. यह सुविधा मिसाइलों के इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और नियंत्रण प्रणालियों को एक साथ जोड़ने (इंटीग्रेट करने) का मुख्य केंद्र बनेगी.
इस मिसाइल इंटीग्रेशन फैसिलिटी में क्या खास है?
बेंगलुरु में उद्घाटन की गई इस नई यूनिट का मुख्य ध्यान आधुनिक मिसाइल प्रणालियों के निर्माण, संयोजन (Assembly) और परीक्षण (Testing) पर केंद्रित होगा-
- आकाश मिसाइल रेजिमेंट सिस्टम का निर्माण: यहां मुख्य रूप से आकाश (Akash) मिसाइल प्रणाली के तीसरे और चौथे रेजिमेंट कॉम्बैट सिस्टम का निर्माण और एकीकरण किया जा रहा है. रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान इन सिस्टमों को हरी झंडी दिखाकर सेना के लिए रवाना भी किया.
- माउंटेन फायर कंट्रोल रडार: इस फैसिलिटी में पहाड़ों और ऊंचे युद्ध क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए माउंटेन फायर कंट्रोल रडार (Mountain Fire Control Radar) का भी निर्माण और अनावरण किया गया है. यह रडार कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में दुश्मन की मिसाइलों को ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने में सटीक मदद करेगा.
- स्वदेशी मिसाइल प्रोजेक्ट्स: यहां क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM), प्रोजेक्ट कुशा (MR SAM/LR SAM) और काउंटर ड्रोन सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय रक्षा कार्यक्रमों के लिए पुर्जे और मिसाइल सब-सिस्टम तैयार किए जाएंगे.
AI का ‘दिमाग’
रक्षा मंत्री ने बेंगलुरु से ही रिमोट के जरिए पुणे में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (CoE-AI) का उद्घाटन किया. उन्होंने BEL की नई AI पॉलिसी भी लॉन्च की. अब भारतीय सेना के हथियारों में एआई का ‘दिमाग’ होगा, जो युद्ध के मैदान में पलक झपकते ही दुश्मन की पहचान कर उसे नष्ट करने का फैसला ले सकेगा. राजनाथ सिंह ने कहा कि एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग अब भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की जरूरत हैं.
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) में एक अत्याधुनिक मिसाइल एकीकरण सुविधा का उद्घाटन राजनाथ सिंह ने किया.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का मंत्र
एक महत्वपूर्ण खुलासे में रक्षा मंत्री ने बताया कि हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत के स्वदेशी हवाई रक्षा और एंटी-ड्रोन सिस्टम ने दुश्मनों के खतरों को सफलतापूर्वक मिट्टी में मिला दिया था. उन्होंने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सराहना करते हुए कहा कि एआई आधारित प्रणालियों ने हमारे सैनिकों के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है.
आत्मनिर्भर भारत: विकसित भारत की ओर
BEL द्वारा विकसित की जा रही तकनीकों जैसे QRSAM, LCA Mk II, और प्रोजेक्ट कुशा (MR SAM/LR SAM) का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि केवल स्वदेशी हथियारों से मिली जीत ही देश को असली आत्मविश्वास देती है. उन्होंने स्टार्टअप्स और युवा वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे तकनीकी दौड़ में दुनिया से आगे रहें ताकि 2047 तक ‘विकसित भारत’ का सपना साकार हो सके.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें
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