इंडिगो ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में यात्रा मांग को प्रभावित कर सकती हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी का कहना है कि गर्मी के मौसम में यात्रियों की संख्या पर इसका असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि भारत में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली इस विमान सेवा के सामने लागत का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। कंपनी के मुताबिक ईंधन और विदेशी मुद्रा से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे संचालन महंगा होता जा रहा है।
बताते चलें कि विमान उद्योग इस समय तीन तरफ से दबाव झेल रहा है, जिसमें ईंधन की कीमतों में तेजी, बीमा लागत में बढ़ोतरी और हवाई मार्गों में बदलाव शामिल हैं। पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण विमानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे खर्च और समय दोनों बढ़ रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, विमान ईंधन कुल संचालन लागत का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा होता है, ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर किराए पर पड़ रहा है। इसी दबाव को कम करने के लिए इंडिगो ने 14 मार्च से अतिरिक्त ईंधन शुल्क लागू किया है, जो दूरी के हिसाब से अलग-अलग तय किया गया है।
गौरतलब है कि एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और आकासा एयर जैसी अन्य कंपनियों ने भी इसी तरह के अतिरिक्त शुल्क लागू किए हैं।
कंपनी का कहना है कि किराए में बढ़ोतरी का असर यात्रियों की संख्या पर पड़ सकता है और मांग में कमी आ सकती है। ऐसे में स्थिति के अनुसार उड़ानों की संख्या और क्षमता में बदलाव किया जाएगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का कार्यक्रम अभी पूरी तरह तय नहीं है और हालात के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है। वहीं घरेलू स्तर पर कंपनी अभी भी पिछले महीनों में हुए संचालन से जुड़े संकट से उबरने की कोशिश कर रही है।
इस बीच शेयर बाजार में कंपनी के प्रदर्शन में तेजी देखने को मिली है, जहां इसके शेयरों में उछाल दर्ज किया गया।
इस तरह देखा जाए तो बढ़ती लागत और वैश्विक अस्थिरता के बीच विमान कंपनियों के सामने संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है और इसका सीधा असर यात्रियों की जेब और यात्रा योजनाओं पर पड़ सकता है।
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