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एम्स नई दिल्ली और आईआईटी दिल्ली ने मिलकर एक ऐसी रोबोटिक अल्ट्रासाउंड तकनीक विकसित की है, जो हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति का अल्ट्रासाउंड दिल्ली के अस्पताल में बैठकर ही कर सकते हैं. इसकी झलक एम्स के डॉक्टरों ने अंटार्कटिका के मैत्री स्टेशन में बैठे मरीज का दूर से FAST स्कैन कर दिखाई है.
एम्स ने टेलीरोबोटिक अल्ट्रासाउंड सिस्टम से अंटार्कटिका में बैठे मरीज का अल्ट्रासाउंड किया है.
कैसे किया गया अल्ट्रासाउंड?
एम्स दिल्ली में बैठे डॉक्टर ने एक विशेष कंट्रोल डिवाइस, हैप्टिक कंट्रोल की मदद से अंटार्कटिका में लगे रोबोटिक हाथ को संचालित किया. यह रोबोटिक हाथ डॉक्टर के हाथ की हर एक हरकत को न केवल दोहरा रहा था बल्कि एकदम सही तरीके से अंजाम दे रहा था और अल्ट्रासाउंड की तस्वीरें भी सामान्य अल्ट्रासाउंड की तरह ही डॉक्टर की स्क्रीन पर दिखाई दे रही थीं.
रोबोट कितना कारगर?
डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि यह रोबोटिक सिस्टम 60 डिग्री तक घूम सकता है और इसमें तीन आगे-पीछे और तीन घुमावदार दिशाओं में मूवमेंट की सुविधा है. यह बिल्कुल ऐसे ही घूमता है जैसे एक एक अनुभवी सोनोग्राफी विशेषज्ञ का हाथ काम करता है क्योंकि इसमें फोर्स फीडबैक की सुविधा भी है, जिससे डॉक्टर को यह महसूस होता है कि जांच के दौरान कितना दबाव लगाया जा रहा है. इस प्रोसेस में तस्वीरों की क्वालिटी भी इतनी अच्छी है कि डॉक्टर आसानी से उनकी जांच कर सकते हैं और तस्वीरें स्क्रीन पर आने में भी बहुत देर नहीं होती, अधिकतम एक सेकेंड की देर होती है.
किन मरीजों के लिए फायदेमंद?
टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड सिस्टम उन मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है जो अस्पताल नहीं आ सकते लेकिन उन्हें जांच की सख्त जरूरत है. इससे हजारों किलोमीटर देर बैठे मरीज को आसानी से इलाज मिल सकेगा.
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अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें
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