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12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही बोइंग 787-8 फ्लाइट टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी।
अहमदाबाद में एअर इंडिया प्लेन क्रैश के 10 महीने बाद करीब 30 पीड़ित परिवारों ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा है। उन्होंने PM से फ्लाइट का ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) डेटा सार्वजनिक करने की मांग की है।
परिजनों ने कहा, “हमें पैसे नहीं चाहिए। हमें सच्चाई जाननी है। हम जानना चाहते हैं कि हादसा क्यों हुआ और क्या इसमें कोई तकनीकी खराबी थी।” परिजनों का कहना है कि अगर ब्लैक बॉक्स डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम इसे निजी तौर पर परिवारों के साथ साझा किया जाए।
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रहा बोइंग 787-8 विमान टेकऑफ के तुरंत बाद मेडिकल कॉलेज हॉस्टल पर गिर गया था। इस हादसे में 241 यात्री और 19 अन्य लोगों समेत कुल 260 लोगों की मौत हुई थी।
पीड़ित परिवारों ने लेटर की कॉपी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB), डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजी हैं। लेटर में कई परिवारों ने संस्थागत मदद की कमी पर भी चिंता जताई।
हादसे में अपनी मां को खोने वाली किंजल पटेल ने एअर इंडिया की वेबसाइट के इस्तेमाल में आ रही दिक्कतों का जिक्र किया, जहां पीड़ितों के सामान की पहचान करनी होती है। उन्होंने कहा, “वहां 25,000 से ज्यादा सामानों की सिल्ट हैं, लेकिन तस्वीरें साफ नहीं हैं, जिससे कुछ ढूंढ पाना नामुमकिन है।”
वहीं अपनी मां, भाई और बेटी को खोने वाले खेड़ा के रोमिन वोरा ने बताया कि डिजिटल साधनों की जानकारी न होने के कारण कई परिवारों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा, “सिर्फ एक ईमेल आईडी है और जवाब आने में 15 दिन तक लग जाते हैं। गांव के कई लोग ईमेल इस्तेमाल करना भी नहीं जानते।”
उन्होंने यह भी कहा कि वेबसाइट पर निजी सामान को सार्वजनिक रूप से दिखाना असंवेदनशील है। प्लेन क्रैश में 24 साल के बेटे की मौत के बाद निलेश पुरोहित ने कहा, “अब मेरा घर बिल्कुल खाली लगने लगा है। कोई भी मुआवजा इस कमी को पूरा नहीं कर सकता। हमें पैसे नहीं, बल्कि सच्चाई जाननी है।”
इस मामले में एअर इंडिया की प्रतिक्रिया का इंतजार है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने पिछले साल जुलाई में प्लेन क्रैश की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। फाइनल रिपोर्ट इस साल जून में, यानी हादसे की पहली बरसी के आसपास आने की संभावना है।
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