अपने कमबैक वीडियो ‘Still Alive’ में, जो इस वक्त इंटरनेट पर खूब ट्रेंड कर रहा है, समय रैना ने एक ऐसी घटना शेयर की जिसमें अपूर्वा मुखीजा भी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि शो के बाद जब वो अपूर्वा से मिलने गए, तो उन्होंने उसे रोते हुए देखा। एक पुरुष होने के नाते उन्हें ये तो समझ आता है कि किसी महिला से कैसे पूछा जाए कि क्या हुआ, लेकिन असली दिक्कत वहां आती है जब बात उसे दिलासा देने की होती है। और सच कहें तो ये सिर्फ समय की नहीं, बल्कि बहुत से पुरुषों की कड़वी सच्चाई है, उन्हें समझ नहीं आता कि ऐसे समय में क्या किया जाए। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि थोड़ी समझ और सही तरीके से आप ये सीख सकते हैं।
सुनना ही सबसे बड़ा सहारा है
अक्सर हम सोचते हैं कि सामने वाले को तुरंत सलाह देनी चाहिए या उसकी समस्या का हल बताना चाहिए। लेकिन असल में, जब कोई परेशान होता है, तो उसे बस कोई चाहिए होता है जो उसे ध्यान से सुने। बीच में टोके बिना, बिना जज किए उसकी बात सुनना ही सबसे बड़ा सपोर्ट होता है। कई बार शब्दों से ज्यादा आपकी चुप्पी और ध्यान काम कर जाते हैं।
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‘सब ठीक हो जाएगा’ से आगे बढ़िए
‘सब ठीक हो जाएगा’ जैसी लाइन हम सबने कई बार कही है, लेकिन सच ये है कि इससे सामने वाले को खास फर्क नहीं पड़ता। इसके बजाय, आप ये कह सकते हैं कि ‘मैं तुम्हारे साथ हूं’ या ‘तुम अकेली नहीं हो’। ये छोटे-छोटे वाक्य ज्यादा असर करते हैं क्योंकि ये सामने वाले को सुरक्षा और साथ होने का एहसास देते हैं।
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समाधान नहीं, साथ देने की कोशिश करें
हर समस्या का तुरंत हल देना जरूरी नहीं होता। कई बार सामने वाला सिर्फ ये चाहता है कि आप उसके साथ खड़े रहें। अगर वो खुद से कुछ कहना या करना चाहती है, तो उसे स्पेस दें, लेकिन ये जरूर जताएं कि जब भी जरूरत होगी, आप वहीं हैं। यही असली दिलासा होता है। आखिर में बात बस इतनी सी है, दिलासा देना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, लेकिन इसमें थोड़ी समझ, थोड़ा धैर्य और बहुत सारा इंसानियत चाहिए।
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