1967 में रिलीज हुई फिल्म ‘पत्थर के सनम’ का सदाबहार गीत ‘महबूब मेरे’ आज भी हर आशिक के दिल की आवाज माना जाता है. इस खूबसूरत गीत पर वहीदा रहमान की नाजुक अदाएं और भावपूर्ण अभिनय इसे अमर बना देते हैं. लता मंगेशकर और मुकेश की जादुई आवाजों में सजा यह गीत प्रेम की मासूमियत, इंतजार और दर्द को बेहद सलीके से बयां करता है. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत इस गीत को ऐसा भावनात्मक स्पर्श देता है कि सुनते ही दिल रोम-रोम तक भीग जाता है. करीब 59 साल बाद भी ‘महबूब मेरे’ की मिठास कम नहीं हुई है। यह गाना सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि उस दौर की सादगी, शालीनता और गहराई को दर्शाता है, जब इश्क को शब्दों और सुरों में महसूस किया जाता था.। वहीदा रहमान की आंखों की खामोशी और गीत के बोल आज भी श्रोताओं को प्यार के उसी एहसास में डुबो देते हैं, जिसने इसे सदाबहार बना दिया.
Discover more from HINDI NEWS BLOG
Subscribe to get the latest posts sent to your email.