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सोनम वांगचुक पर 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा भड़काने के आरोप हैं।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक को इसलिए हिरासत में लिया गया, क्योंकि वे पाकिस्तान और चीन से सटे संवेदनशील बॉर्डर इलाके में लोगों को भड़का रहे थे।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच लद्दाख हिंसा से जुड़े मामले में वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत का आदेश देने से पहले सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
दरअसल, 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 26 वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में लिया गया था। तब से वे जोधपुर जेल में हैं।

सरकार की सुप्रीम कोर्ट में 4 मुख्य दलीलें…
- वांगचुक ने कहा था कि लद्दाख के लोगों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार नहीं है, जबकि चीन और तिब्बत जैसे इलाकों को स्वायत्त अधिकार मिले हुए हैं।
- अगर कोई चीनी नागरिक ऐसी बात कहता, तो समझ में आता। यह सैंडविच की तरह है। एक तरफ भी गांधीजी की बात, दूसरी तरफ भी गांधीजी की बात। लेकिन बीच में जो कहा जा रहा है, वही चिंता का विषय है। यह व्यक्ति पाकिस्तान और चीन से सटे सीमा इलाके में लोगों को भड़का रहा है।
- वांगचुक के बयान देश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं। उनके भाषणों में भारत की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और जरूरी आपूर्ति बाधित होने के संकेत मिलते हैं।
- यह निवारक कार्रवाई इसलिए की गई, ताकि वांगचुक इस तरह के बयान दोहराते न रहें। NSA का मकसद ही भविष्य में खतरे को रोकना है। हर राज्य की अपनी क्षेत्रीय संवेदनशीलता होती है।

सरकार ने कहा था- वांगचुक लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश बनाना चाहते थे
इससे पहले 2 फरवरी को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सोनम वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं। ऐसे व्यक्ति को और जहर उगलने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि वांगचुक के भाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सीधा खतरा दिखता है। जिला मजिस्ट्रेट (DM) ने हालात को देखते हुए गिरफ्तारी का सही फैसला लिया।
मेहता ने कहा कि नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे उदाहरण देना, युवाओं को भड़काने और देश की एकता के खिलाफ माहौल बनाने के बराबर है। पूरी खबर पढ़ें…
पत्नी गीतांजलि बोली थीं- अधिकारियों ने सही फैसला नहीं किया
इससे पहले वांगचुक की पत्नी गीताांजलि अंग्मो ने 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनके पति को हिरासत में लेने के फैसले में अधिकारियों ने ठीक से सोच-विचार नहीं किया। उन्हें बेकार व गैर-जरूरी बातों के आधार पर नजरबंद किया गया।
अंग्मो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच में दावा किया कि जिन चार वीडियो के आधार पर नजरबंदी की गई वे सोनम वांगचुक को दिए ही नहीं गए।
इससे उनका अपना बचाव में सही ढंग से बात रखने का अधिकार छिन गया। वीडियो नहीं देने से वांगचुक का सलाहकार बोर्ड और सरकार के सामने अपनी बात रखने का अधिकार प्रभावित हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…

वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य बनाने की मांग कर रहे

ये तस्वीर 26 सितंबर (2025) की है जब सोनम को गिरफ्तार किया गया था।
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे थे। आन्दोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया।
NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।
अंग्मो ने कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा का सोनम वांगचुक के बयानों या कामों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख का शांतिपूर्ण आंदोलन विफल हो जाएगा।
दरअसल लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने यहां से धारा 370 और 35 ए को हटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग राज्य बनाया था। जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला राज्य बनाया था, जिसका प्रशासन राज्य सरकार के पास और सुरक्षा व्यवस्था केंद्र सरकार के पास है, जबकि लद्दाख को पूरी तरह केंद्र शासित राज्य बनाया था।

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सोनम वांगचुक को जोधपुर जेल के पानी से पेट दर्द:गंभीर संक्रमण की शिकायत; सरकार ने कहा- 21 बार जांच हुई; सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये आदेश

जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद सोनम वांगचुक की तबीयत खराब हो गई है। लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता वांगचुक ने जेल के दूषित पानी की वजह से पेट में गंभीर संक्रमण और दर्द की शिकायत की है। वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर जेल प्रशासन को विशेषज्ञ से जांच कराने के आदेश दिए हैं। वहीं सरकार ने कहा कि उनकी अब तक 21 बार जांच हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…
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