अगले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार कई बड़े फैक्टर जैसे RBI की MPC मीटिंग, नवंबर की ऑटो सेल्स, अमेरिका का PCE इंफ्लेशन डेटा, भारत-अमेरिका ट्रेड डील की प्रोग्रेस और FII की बिकवाली से प्रभावित होगा. एक्सपर्ट का कहना है कि इन फैक्टर्स के चलते मार्केट की चाल पर असर पड़ सकती है.
बीते हफ्ते बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 474.75 अंक या 0.55 फीसदी चढ़ा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 134.8 अंक या 0.51 फीसदी के लाभ में रहा.

भारतीय शेयर बाजार अगले हफ्ते साल 2025 के आखिरी महीने में कदम रखेगा. बाजार की दिशा 1 दिसंबर से शुरू होने वाले हफ्ते में कई बड़े फैक्टर तय करेंगे.

एनालिस्ट्स का कहना है कि अगले हफ्ते RBI की पॉलिसी मीटिंग, ऑटो सेक्टर की बिक्री के आंकड़े, अमेरिका से आने वाले आर्थिक डेटा, भारत-अमेरिका ट्रेड डील की प्रगति और एफआईआई की गतिविधियों से शेयर बाजार की दिशा तय होगी.
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 से 5 दिसंबर तक होगी और 5 दिसंबर को रेपो रेट का फैसला आएगा.आरबीआई ने अगस्त से रेपो रेट 5.5% पर स्थिर रखा है. इस बार भी रेट में बदलाव की उम्मीद कम है, लेकिन RBI की टिप्पणी बाजार के लिए अहम संकेत देगी.

1 दिसंबर को ऑटो कंपनियां नवंबर की बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी. अच्छे नंबर आए तो मांग में सुधार का संकेत मिलेगा और बाजार को सहारा मिल सकता है. कमजोर आंकड़े ग्रामीण डिमांड और मार्जिन पर असर की चिंता बढ़ा सकते हैं.

अगले हफ्ते अमेरिका में ट्रेडिंग सामान्य रहेगी, लेकिन डेटा कम आएगा. सबसे अहम होगा सितंबर का PCE इंफ्लेशन डेटा, जो फेडरल रिजर्व का पसंदीदा महंगाई इंडीकेटर है. इसे लेकर ग्लोबल मार्केट्स की नजर टिकी रहेगी.

भारत की कोशिश है कि साल के अंत तक अमेरिका के साथ ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल हो जाए. ज्यादातर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है. हालांकि अमेरिका की रूस से तेल खरीद और कुछ एग्री प्रोडक्ट्स पर टैरिफ को लेकर सख्त स्थिति बनी हुई है. यह डील मार्केट सेंटीमेंट को पॉजिटिव या निगेटिव रूप से प्रभावित कर सकती है.

पिछले कुछ महीनों की तरह इस हफ्ते भी एफआईआई बिकवाली जारी रखे हुए हैं. सालभर में FII की तरफ से नेट आउटफ्लो 2.58 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. वहीं DII लगातार सपोर्ट दे रहे हैं. यह ट्रेंड आगे भी मार्केट में उतार-चढ़ाव ला सकता है.


