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- Maghi Purnima Puja Rituals, Donation, Satynanarayan Katha Imporatance, Mahalaxmi Puja Vidhi, Maghi Purnima On 1st February
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आज (रविवार, 1 फरवरी) माघी पूर्णिमा है। इस तिथि पर गंगा, यमुना, शिप्रा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि माघी पूर्णिमा पर किए गए पूजा-पाठ और दान‑पुण्य से अक्षय पुण्य मिलता है। ऐसा पुण्य जिसका शुभ असर जीवनभर बना रहता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस बार माघी पूर्णिमा रविवार को है और आज सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। इन शुभ योगों की वजह से माघ मास की पूर्णिमा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। जानिए आज कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…
- माघी पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान नहीं कर पा रहे हैं, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
- सुबह स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और लोटे में फूल, कुमकुम, चावल डालें। इसके बाद ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं। अर्घ्य देने का स्थान चुनते समय ध्यान रखें कि सूर्य को चढ़ाए हुए जल पर किसी का पैर नहीं लगना चाहिए।
- माघी पूर्णिमा पर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, कंबल, धन आदि का दान करने से पुण्य मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है, ऐसी मान्यता है।
- घर के मंदिर में सबसे पहले भगवान गणेश का पूजा करें। पूजा में गणेश जी को दूध, जल, पंचामृत से स्नान कराएं। हार-फूल और नए वस्त्रों से श्रृंगार करें। दूर्वा और लड्डू का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करें।
- गणेश पूजन के बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें। दक्षिणावर्ती शंख में जल, दूध, पंचामृत भरकर भगवान की प्रतिमाओं को स्नान कराएं। हार-फूल और नए वस्त्रों से श्रृंगार करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत चढ़ाएं। बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, गुलाब आदि फूल-पत्तियां चढ़ाएं। शिवलिंग पर चंदन का लेप करें। गुलाल, अबीर, भस्म आदि चीजें चढ़ाएं। मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
- पूर्णिमा पर हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर सुंदरकांड का पाठ करें। अगर समय अभाव हो तो हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। आप चाहें तो राम नाम का जप भी कर सकते हैं।
- भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का अभिषेक करें। माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।
- पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की पूजा करने और कथा पढ़ने-सुनने की परंपरा है। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं।
- पूर्णिमा की दोपहर करीब 12 बजे पितरों के लिए धूप-ध्यान करें। गाय के गोबर का कंडा जलाएं और जब धुआं निकलना बंद हो जाए, तब गुड़-घी अर्पित करें। ऊँ पितृदेवेभ्यो नम: मंत्र का जप करें। हथेली में जल लें और अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित करें।
- शाम को चंद्र उदय के बाद जल में थोड़ा दूध मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप करें।
- माघी पूर्णिमा पर मंत्र जप के साथ ही ध्यान भी करना चाहिए, ऐसा करने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और विचारों में पवित्रता आती है।
सोमवार से शुरू होगा फाल्गुन मास
फाल्गुन मास (2 फरवरी से 3 मार्च तक) हर साल फरवरी-मार्च के बीच आता है। इस महीने में वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। इस महीने में ऋतु परिवर्तन के कारण मौसम सुहावना और हल्का ठंडा रहता है। किसानों की फसलों के लिए ये समय बहुत अच्छा माना जाता है। इस महीने में स्नान, दान, मंत्र जप और तपस्या करने की परंपरा है।
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