Job Opportunity : नौकरी की तलाश करने वाले युवाओं को अब ज्यादा तैयारी के साथ आवेदन करना होगा. कंपनियों ने अपने लिए जरूरी प्रतिभा की पहचान करने के लिए एआई का सहारा लेना शुरू कर दिया है.
एआई की मदद से कंपनियां प्रतिभाओं की पहचान कर रही हैं.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 80 फीसदी नियोक्ताओं के अनुसार, एआई से उम्मीदवारों के कौशल को समझना आसान हुआ है, जबकि 76 फीसदी मानते हैं कि एआई भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में मदद कर रहा है. लिंक्डइन की यह रिपोर्ट नवंबर 2025 में 19,113 भारतीय उपभोक्ताओं और 6,554 वैश्विक एचआर (मानव संसाधन) पेशेवरों के बीच किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है.
कंपनियों को नहीं मिल रहे योग्य उम्मीदवार
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में भर्ती बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन योग्य उम्मीदवार खोजने में 74 फीसदी नियोक्ता कठिनाई का सामना कर रहे हैं, जबकि नियुक्ति गतिविधि महामारी से पहले के स्तर से 40 फीसदी अधिक है. नियोक्ता भर्ती में एआई-जेनरेटेड आवेदनों (53 फीसदी) और मांग वाले कौशल की कमी (47 फीसदी) को चुनौतियों के रूप में बता रहे हैं. 48 प्रतिशत नियोक्ताओं का कहना है कि वास्तविक और कम गुणवत्ता वाले या भ्रामक आवेदन अलग करने में समय लगता है. एआई की मदद से यह काम आसान हो गया है.
अभी और बढ़ेगा एआई का इस्तेमाल
रिपोर्ट में कहा गया कि भविष्य में एआई का इस्तेमाल और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि 80 फीसदी भारतीय नियोक्ता इसे भर्ती लक्ष्यों, उम्मीदवार मूल्यांकन और शीर्ष प्रतिभाओं को खोजने के लिए बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. उनका कहना है कि एआई से न सिर्फ उन्हें भर्ती प्रक्रिया को जल्द निपटाने में मदद मिली है, बल्कि बड़ी संख्या में आने वाले आवेदनों में से योग्य उम्मीदवारों को छांटने और उनका मूल्यांकन करने में भी आसानी हुई है.
आवेदक के लिए क्या खास
रिपोर्ट के अनुसार, अब आवेदकों को भी काफी सजग रहने की जरूरत होगी, क्योंकि एआई की मदद से कंपनियां उनकी खूबी और खामी को आसानी से पकड़ सकती हैं. आवेदक को भी अब कंपनियों में नौकरी के लिए अप्लाई करते समय में इस बात का ध्यान रखना होगा कि उनका पाला तकनीक से पड़ा है. लिहाजा उन्हें भी अपनी प्रतिभा और खूबी को प्रमुखता से रखने की रणनीति पर काम करना होगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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