Indian Real Estate : भारत के रियल एस्टेट बाजार में तेजी से बदलाव दिख रहा है. रियल एस्टेट सलाहकार फर्म एनारॉक ने बताया है कि देश में साल 2030 तक जेसीसी की संख्या 2,400 तक पहुंच सकती है. देश में इसका आकार बढ़कर 110 अरब डॉलर पहुंच सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत साल 2030 तक 2,400 से ज्यादा जीसीसी का मेजबान बनने के लिए तैयार है, जहां 28 लाख से ज्यादा प्रोफेशनल्स को रोजगार मिलेगा. साल 2024 के अंत तक देश में 1,700 से ज्यादा जीसीसी थे. रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि देश में जीसीसी के बाजार आकार साल 2030 तक 105-110 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 2024 में 64 अरब डॉलर था.
अभी 19 लाख लोग कर रहे काम
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि साल 2024 के अंत तक भारत में 1,700 से ज्यादा जीसीसी थे, जिनमें 19 लाख से ज्यादा प्रोफेशनल्स काम कर रहे थे. पिछले कुछ वर्षों में भारत में जीसीसी का विस्तार तेजी से हुआ है, जहां साल 2019 में इसके बाजार का आकार 30 अरब डॉलर था, जो साल 2024 में बढ़कर 64 अरब डॉलर हो गया. इसका मतलब है कि महज 5 साल में इसमें दोगुने से भी ज्यादा की तेजी देखी गई.
किस सेक्टर में आई तेजी
यह वृद्धि आईटी/आईटीईएस, बीएफएसआई, हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज और इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ईआरएंडडी) जैसे प्रमुख क्षेत्रों से लगातार बढ़ती मांग के कारण दिख रही है. पुरी ने कहा कि यह रफ्तार आगे भी जारी रहने की उम्मीद है. भारतीय जीसीसी बाजार साल 2030 तक 105-110 अरब डॉलर के बाजार आकार तक पहुंच सकता है, जिसकी सालाना वृद्धि दर 10 फीसदी है. भारत में जीसीसी की मौजूदगी अब टॉप-7 शहरों से आगे बढ़कर जयपुर, इंदौर, सूरत, कोच्चि और कोयंबटूर जैसे टियर-2 शहरों तक फैल रही है.
बदल रहा रियल एस्टेट बाजार
एफआईसीसीआई कमेटी ऑन अर्बन डेवलपमेंट एंड रियल एस्टेट के चेयरमैन और आरएमजेड कॉर्प के चेयरमैन ऑफ सुपरवाइजरी बोर्ड राज मेहंदा ने कहा कि तीन दशकों तक भारत के ऑफिस रियल एस्टेट मार्केट को सिर्फ एक लागत के रूप में देखा जाता था, जिसे मैनेज करना होता था. आज यह एक रणनीतिक साधन बन गया है. यह तय करता है कि ग्लोबल पूंजी कहां निवेश होगी, उच्च मूल्य वाले रोजगार कहां बनेंगे और भारत की युवा वर्कफोर्स कहां रहना पसंद करेगी. भारत के टॉप-7 शहरों में पहले से ही करीब 80 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड ए ऑफिस स्टॉक है, जिसमें बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर का हिस्सा लगभग आधा है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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