Rules for loco pilots in fog- क्या आपको पता है कि लोको पायलट अपनी मर्जी से भी ट्रेन चला सकता है. उस पर रेलवे के कोई नियम लागू नहीं होता है. रेलवे जानते हुए भी उस पर कोई एक्शन नहीं ले सकता है. सुनकर हैरानी जरूरी हो रही होगी, लेकिन यह सच है, रेलवे लोको पायलट को छूट दे देता है.
कोहरे में लोको पायलट को अपनी मर्जी से ट्रेन चलाने की होती है छूट.
लोकोपायलट को इस तरह की छूट कोहरे के दौरान दी जाती है. यानी आजकल उसे अपने हिसाब से ट्रेन चलाने की छूट दी जाती है. हालांकि ड्यूटी शुरू करने के साथ यानी ट्रेन में चढ़ने से पूर्व उसे एक रूट प्लान दिया जाता है, जिसमें ट्रेन चलाने के नियम लिखे होते हैं, जिसे मानना अनिवार्य होता है.
क्या हैं नियम
कोहरे के दौरान उसे स्पीड को लेकर नियमों का पालन करना अनिवार्य नहीं होता है. ट्रेनों की स्पीड उसके विवेक पर छोड़ दिया जाता है. वो तय करता है कि कहां पर तेज स्पीड से और कहां पर धीमी ट्रेन चलाई जा सकती है.यानी इस दौरान पूरी तरह से उसकी मर्जी चलती है.
क्यों चलाता है अपनी मर्जी
किसी सेक्शन में ट्रेन की स्पीड अधिकतम 60 किमी.प्रति घंटे निर्धारित है, लेकिन कोहरे की वजह से वहां पर तय स्पीड से ट्रेन चलाना खतरे से खाली नहीं है. क्योंकि किसी किसी स्थान पर अचानक घना कोहरा आ जाता है, जहां पर विजिबिलिटी बहुत कम हो जाती है. ऐसे में अगर तय स्पीड से ट्रेन चलाएगा तो हादसा होने की आशंका रहती है, इस वजह से लोकोपायलट को उसके विवेक पर स्पीड तय करने की छूट होती है. कहां पर धीमी चलानी है और कहां पर स्पीड से. क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की प्राथमिकता है.
क्या है रेल मैन्युअल
रेल मैन्युअल में ट्रेनों के चलाने के नियम दर्ज हैं, मसलन लोकोपायलट कहां पर हार्न बजाएगा, कितनी दूरी पर पहले हार्न बजाएगा, कहां पर कितनी स्पीड में ट्रेन चलेगी और कहां पर धीमी होगी. उसे नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है. अगर नियमों का पालन नहीं कर पाता तो उसे ड्यूटी ऑफ करने से पहले जवाब देना होता है. इसी वजह से ट्रेनों की पंक्चुअलिटी मेंटेन की जाती है.
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