Child Swallows Hulk Toy: गुजरात में एक डेढ़ साल के बच्चे ने हल्क खिलौना निगल लिया. इसके बाद उसे उल्टी होने लगी और वह काफी परेशान हो गया. परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, तो एक्सरे में खिलौना साफ नजर आया. इसके बाद डॉक्टर्स ने एंडोस्कोपी के जरिए खिलौना बाहर निकालकर बच्चे की जान बचाई. डॉक्टर्स की मानें तो अगर कोई बच्चा खिलौना या कोई नुकीली चीज निगल ले, तो तुरंत हॉस्पिटल ले जाना चाहिए. इसमें देरी करने से बच्चे की जान जा सकती है.
जब बच्चा एक साल का हो जाता है, तब वह अधिकतर चीजों को अपने मुंह में डालने की कोशिश करता है. कई बार बच्चा खेलते वक्त कंचा, पिन, कील, सिक्का, चुंबक या बटन बैटरी को मुंह में डालकर निगल जाता है. इससे उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और तबीयत बिगड़ जाती है. ऐसी कंडीशन में तुरंत हॉस्पिटल ले जाना बहुत जरूरी होता है.

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया कि बच्चों के डेवलपमेंट का एक फेज होता है. जब बच्चों को उम्र 6 महीने हो जाती है, उसके बाद वे मुंह से चीजों को पहचानने की कोशिश करते हैं और हर चीज को मुंह में ले जाते हैं. ऐसे में पैरेंट्स को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए.

डॉक्टर ने बताया कि जब कोई बच्चा सिक्का, कंचा, बटन बैटरी, मैग्नेट, पिन, सुई या कील जैसी चीजें निगल लेता है, तब अक्सर ये चीजें उसके खाने की नली में फंस जाती हैं. इस कंडीशन में वह सांस नहीं ले पाता है और तबीयत बिगड़ने लगती है. अगर कोई चीज चिकनी होती है, तब यह पेट में पहुंच जाती है. नुकीली चीजें अक्सर बच्चों के गले में फंस जाती हैं.
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आजकल बैटरी वाले खिलौनों का ट्रेंड बढ़ गया है और इसमें बटन बैटरी व मैग्नेट होती हैं. ये चीजें अगर बच्चा निगल जाए, तो सबसे ज्यादा खतरा पैदा हो जाता है. मैग्नेट आंतों को आपस में चिपका देती हैं, जिससे कंडीशन गंभीर हो जाती है. मैग्नेट के कई बार अलग-अलग टुकड़े होते हैं, जिन्हें निकालना डॉक्टर्स के लिए भी कई बार मुश्किल हो जाता है.

एक्सपर्ट के अनुसार बैटरी में लेड होता है, जो कई बार पेट में घुल जाता है. इस कंडीशन में पेट में टॉक्सिसिटी हो सकती है और इससे बच्चे की जान भी जा सकती है. अगर बच्चा कोई चीज निगले और वह गले में ऊपर ही फंसी हो, तो पीठ थपथपाने से वह बाहर निकल सकती है, लेकिन ऐसी कंडीशन में पैरेंट्स को हाथ से उस चीज को निकालने से बचना चाहिए.

डॉक्टर अरोड़ा का कहना है कि अगर बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो, खाना अटक रहा हो, उल्टी हो रही हो या बच्चा रो रहा हो, तब यह कुछ निगलने का संकेत हो सकता है. पैरेंट्स को ऐसी कंडीशन में तुरंत बच्चे को नजदीकी अस्पताल में ले जाना चाहिए और डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. अगर बच्चा कुछ निगल ले और 4-6 घंटे के अंदर अस्पताल आ जाए, तो वह चीज पेट में ही मिल जाती है और उसे निकालना आसान हो जाता है.

एक्सपर्ट के मुताबिक खिलौना, कंचा या कोई नुकीली चीज अगर पेट से आंतों में पहुंच जाए, तो आंत फट सकती है और ऐसी कंडीशन में तुरंत ऑपरेशन करने की जरूरत होती है. अगर खिलौना, कंचा, सिक्का, मैग्नेट या बैटरी गले की नली में फंसी हो, तो इन चीजों को निकालने के लिए एंडोस्कॉपी का सहारा लिया जाता है. इसमें जरूरत के अनुसार कई उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं. कई बार चीजों को लेजर के जरिए पहले तोड़ा जाता है, फिर उन्हें निकाला जाता है.

पेट में मैग्नेट हो, तो उसके लिए भी अलग डिवाइस होती है, जो मैग्नेट को खींचकर बाहर ले आती है. कंडीशन के अनुसार डॉक्टर एंडोस्कोपी समेत कई प्रोसीजर को फॉलो करते हैं, ताकि बच्चे की जान बचाई जा सके. पैरेंट्स को छोटे बच्चों का खास खयाल रखना चाहिए, ताकि वे कुछ भी गलत चीज न निगलें और अगर ऐसा हो जाए, तो अस्पताल ले जाने में बिल्कुल देरी न करें. इससे बच्चे की जान जा सकती है या कंडीशन सीरियस हो सकती है.
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