Bollywood Most Double Meaning Songs in Blockbuster Movies : बॉलीवुड फिल्में में म्यूजिक के प्रति दीवानगी का एक अलग ही आलम रहता है. जिस फिल्म का म्यूजिक जितना सुपरहिट होगा, उस मूवी के बॉक्स ऑफिस पर चलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है. कई सुपरहिट फिल्मों की पहचान ही सिर्फ गानों से होती है. रेडियो-टीवी-रील्स पर जैसे ही गाना बजता है, लोगों के मन में फिल्म का नाम और उसके सीन उभरने लगते हैं. कई बार किसी फिल्म का गाना वैसे तो बहुत पॉप्युलर होता है, फिर भी ऑल इंडिया रेडियो और विविध भारती जैसे रेडियो चैनल से नहीं बजाया जाता. तीन फिल्मों के साथ ऐसा ही कुछ हुआ. इन तीन फिल्मों का बेहद पॉप्युलर एक सॉन्ग इतना बदनाम हुआ कि उसे कई जगह बैन किया गया. तीनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. ये फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं….
म्यूजिक के बिना बॉलीवुड फिल्मों की कल्पना ही नहीं की जा सकती. म्यूजिक फिल्म की आत्मा हैं. कई बार किसी फिल्म के गाने इतने पॉप्युलर हो जाते हैं कि दर्शकों के दिल-दिमाग में छा जाते हैं. 12 साल के अंतराल में ऐसी तीन फिल्में बनी जिनका एक गाना बहुत पॉप्युलर हुआ. यह बात अलग है कि इन सुपरहिट गानों को ऑल इंडिया रेडियो जैसे प्लेटफॉर्म पर बैन कर दिया गया. तीनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अंधाधुंध पैसे छापे थे. ये तीन फिल्में थीं : विधाता, खलनायक और राजाबाबू.

बॉलीवुड के मशहूर प्रोड्यूसर गुलशन राय 1980 में दिलीप कुमार-अमिताभ बच्चन और अमजद खान को लेकर एक फिल्म बनाना चाहते थे. उन्होंने तीनों को साइन किया था. उन्हीं दिनों सुभाष घई एक अच्छी फिल्म की तलाश में थे. गुलशन राय ने उन्हें डायरेक्ट चुना. फिल्म की कहानी सचिन भौमिक, कादर खान और सुभाष घई ने लिखी. दिलीप कुमार-अमिताभ बच्चन के साथ जो फिल्म बनाई जानी थी, उसकी कहानी में फेरबदल करके मूवी बनाई गई. नाम था : विधाता. अमजद खान और अमिताभ बच्चन इस फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाए. इनकी जगह संजय दत्त, संजीव कुमार और शम्मी कपूर को फिल्म में साइन किया गया. फिल्म की स्टार कास्ट में दिलीप कुमार, संजय दत्त, शम्मी कपूर, संजीव कुमार, पद्मिनी कोल्हापुरे, मदन पुरी और अमरीश पुरी जैसे सितारे शामिल थे.

विधाता फिल्म 3 दिसंबर 1982 को रिलीज हुई थी. म्यूजिक कल्याण जी – आनंद जी का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म में कुल पांच गाने थे. दो गाने ‘सात सहेलियां खड़ी-खड़ी, फरियाद सुनाएं खड़ी-खड़ी’ और ‘हाथों की चंद लकीरों का’ बहुत पॉप्युलर हुए थे. ‘सात सहेलियां खड़ी-खड़ी, फरियाद सुनाएं खड़ी-खड़ी’ फॉक सॉन्ग था. इस गाने को अश्लील करार देते हुए ऑल इंडिया रेडियो पर बैन कर दिया गया था. जिस दिन विधाता रिलीज हुई उसी दिन देवानंद की फिल्म ‘स्वामी दादा’ और बब्बर सुभाष की फिल्म ‘तकदीर के बादशाह’ भी रिलीज हुई थीं. ये दोनों ही फिल्में फ्लॉप रही थीं. विधाता फिल्म की ज्यादातर शूटिंग आगरा में हुई थी.
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यह फिल्म कई मायने में खास थी. यह इकलौती फिल्म है जिसमें 3 लीजेंड दिलीप कुमार, शम्मी कपूर और संजीव कुमार, संजय दत्त और सारिका तथा सुभाष घई और पद्मिनी कोल्हापुरे ने काम किया. इस फिल्म में मदन पुरी के छोटे भाई अमरीश पुरी ने मेन विलेन का रोल निभाया था. फिल्म बनाते समय सुभाष घई संजय दत्त से बहुत नाराज थे. उन दिनों संजय दत्त ड्रग एडिक्ट थे. शम्मी कपूर को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. इतना ही नहीं 8 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. फिल्म 1982 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली मूवी थी.

सुभाष घई ने 1991 में आई सुपरहिट फिल्म ‘सौदागर’ के बाद अमिताभ बच्चन के साथ एक फिल्म प्लान की थी. नाम था : देवा लेकिन यह फिल्म किसी वजह से नहीं बन पाई. कहा जाता है कि इसी फिल्म की स्टोरी में थोड़ा बहुत बदलाव करके नई स्टार कास्ट के साथ ‘खलनायक’ बनाई गई. खलनायक में संजय दत्त, माधुरी दीक्षित, जैकी श्रॉफ, राखी गुलजार, अनुपम खेर, प्रमोद मुथु लीड रोल में थे. फिल्म में राम्या कृष्णा ने भी एक छोटा सा रोल किया था. यह फिल्म 6 अगस्त 1993 को रिलीज हुई थी. विधाता के बाद सुभाष घई की संजय दत्त के साथ यह दूसरी फिल्म थी. फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था. गीतकार आनंद बख्शी थे. म्यूजिक ब्लॉकबस्टर रहा था. फिल्म के सभी गाने आज भी पार्टी-फंक्शन में सुनाई दे जाते हैं. फिल्म का म्यूजिक इंस्टेंट हिट हुआ था. सिर्फ एक हफ्ते के भीतर ही 1 करोड़ ऑडियो कैसेट बिक गए थे. फिल्म के एक गाने ‘चोली के पीछे क्या है’ को बैन करने की भी मांग हुई थी. इस गाने को ऑल इंडिया रेडियो पर बैन भी कर दिया गया था.

‘चोली के पीछे क्या है’ गाने को लेकर खूब विवाद हुआ था. यह गाना माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया था. गाने की शुरुआती लाइनें डबलमीनिंग मानी जाती हैं. उस समय इस गाने को मूवी, कैसेट और सीडी पर बैन भी किया गया था लेकिन पॉप्युलैरिटी को देखते हुए फिर से इसे शामिल किया गया. खलनायक पहली हिंदी फिल्म थी जिसने कनाडा और अमेरिका में बहुत अच्छा बिजनेस किया था. 1993 में मुंबई ब्लास्ट केस में संजय दत्त का नाम आने से फिल्म को बैन करने की मांग कई संगठनों ने उठाई थी. संजय दत्त को जेल भी जाना पड़ा था. यह पहली फिल्म थी जिसकी डबिंग संजय दत्त ने जेल से जमानत पर बाहर आने पर की थी. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के लास्ट सीन में संजय दत्त को जेल जाते हुए दिखाया गया है. ‘चोली के पीछे क्या है’ गाने को अलका याज्ञनिक और इला अरुण ने गाया था. दोनों को बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. यह गाना आनंद बख्शी ने फोन करके सुभाष घई को लिखवाया था. यह गाना 1975 की फिल्म ‘वारंट’ के एक गाने ‘रुक जाना ओ रुक जाना’ से इंस्पायर्ड था. सुभाष घई ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘चोली के पीछे क्या है? सुनते ही पेन मेरे हाथ से गिर गया. जब दूसरी लाइन सुनी तो पूरा मतलब समझ आया.’

प्लेबैक सिंगर अल्का याज्ञनिक ने एक प्रोग्राम में ‘चोली के पीछे क्या है’ सॉन्ग के बारे में मजाकिया अंदाज में जवाब दिया था. उन्होंने कहा था कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है. मैंने तो चोली में दिल है मेरा, इस दिल को मैं दूंगी अपने यार को, बहुत ही निर्दोष भाव से गाया है. इसके पीछे अजीब तरह की आवाजें इला अरुण ने डाली हैं. ‘चोली के पीछे क्या है’ सॉन से इंस्पायर्ड होकर स्लमडॉग मिलेनियर फिल्म का एक और गाना ‘रिंग रिंग रिंगा..रिंग रिंगा…’ एआर रहमान ने कंपोज किया था. इस गाने को भी अल्का याज्ञनिक ने ही गाया था. इस गाने के भी बोल अश्लील माने गए थे. 6 अगस्त 1993 को फिल्म को रिलीज किया गया. फिल्म ने 21 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. यह 1993 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म की लिस्ट में दूसरे नंबर पर थी.

इस लिस्ट में तीसरी फिल्म राजाबाबू है जिसे डेविड धवन ने डायरेक्ट किया था. 21 जनवरी, 1994 को रिलीज हुई इस फिल्म में गोविंदा-करिश्मा कपूर, कादर खान, अरुणा ईरानी, शक्ति कपूर, प्रेम चोपड़ा और गुलशन ग्रोवर लीड रोल में नजर आए थे. फिल्म का म्यूजिक आनंद मिलिंद ने कंपोज किया था. इस फिल्म के एक गाने ‘सरकाय लेओ खटिया जाड़ा लगे’ पर बहुत विवाद हुआ था. इस गाने अश्लील करार देते हुए ऑल इंडिया रेडियो ने बैन कर दिया था.

फिल्म में यह गाना गोविंदा-करिश्मा कपूर पर बहुत ही फूहड़ तरीके से फिल्माया गया था. गीतकार समीर ने यह गाना लिखा था. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में अपना बचाव करते हुए कहा था,’यह एक फॉक सॉन्ग था. गांव में चौपाल में नटिने गाया करती थीं. बचपन से ही यह गाना हम लोग सुनते आ रहे थे. गाने में एक शरारत थी, मस्ती थी, गंदगी नहीं थी लेकिन डेविड धवन ने इसे बहुत ही सेडेक्टिव-वल्गर तरीके से शूट किया.’ राजाबाबू 1992 में आई तमिल मूवी रसुकुट्टी से इंस्पायर्ड थी. बॉक्स ऑफिस यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी.
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