3 फरवरी, 2006 को रिलीज हुई ‘अक्सर’ उन कुछ बॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों में से एक है, जिसने इमरान हाशमी को एक सीरियस एक्टर के तौर पर पहचान दिलाई. आज इस फिल्म को 20 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन इसकी उलझी हुई और धोखे की कहानी आज भी दर्शकों को बांधे रखती है. हिमेश रेशमिया के जादुई संगीत और रोंगटे खड़े कर देने वाले क्लाइमैक्स ने इसे एक कल्ट क्लासिक बना दिया था. प्यार, पैसा और धोखे का यह लव ट्रायंगल साबित करता है कि इमरान हाशमी न सिर्फ रोमांटिक गानों के मास्टर हैं, बल्कि सस्पेंस के भी किंग हैं.
नई दिल्ली. जब हम सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान अक्सर ‘दृश्यम’ या ‘अंधाधुन’ जैसी फिल्मों पर जाता है, लेकिन 2006 में डायरेक्टर अनंत महादेवन ने एक ऐसी उलझी हुई कहानी बुनी थी कि उसे समझना किसी पहेली को सुलझाने जैसा था. ‘अक्सर’ सिर्फ एक लव ट्रायंगल नहीं थी, बल्कि इंसान के लालच और धोखे का प्रतीक थी.

फिल्म की शुरुआत एक अमीर फोटोग्राफर रिकी (इमरान हाशमी) और एक करोड़पति पति राज (डीनो मोरिया) की मुलाकात से होती है. राज अपनी पत्नी शीना (उदिता गोस्वामी) से परेशान है. वह उसे तलाक देना चाहता है, लेकिन एक शर्त ये है कि शीना को खुद राज को छोड़ना होगा ताकि राज को उसे भारी भरकम एलिमनी न देनी पड़े. राज रिकी को एक अजीब ऑफर देता है. वह उसे कहता है, ‘मेरी पत्नी को अपने प्यार के जाल में फंसाओ ताकि वह मुझे तलाक दे दे.’ यहीं से झूठ और धोखे का खेल शुरू होता है, जिसकी परतें फिल्म के आखिर तक खुलती रहती हैं.

2006 तक इमरान हाशमी अपनी रोमांटिक और ‘बोल्ड’ इमेज के लिए जाने जाते थे, लेकिन ‘अक्सर’ में उनका किरदार ‘रिकी’ काफी लेयर्ड था. वह एक मोहरा था जो खुद को खिलाड़ी समझता था. जिस तरह से इमरान ने इस फिल्म में एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर और एक चालाक लवर का रोल निभाया, उसने साबित कर दिया कि वह सिर्फ गानों के लिए ही नहीं, बल्कि सीरियस एक्टिंग के लिए भी बने हैं. उदिता गोस्वामी के साथ उनकी केमिस्ट्री ने स्क्रीन पर आग लगा दी और ‘जहर’ के बाद एक बार फिर सुपर डुपर हिट साबित हुई.
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अगर हम ‘अक्सर’ की बात करें और इसके म्यूजिक का जिक्र न करें तो यह नाइंसाफी होगी. 2006 में हिमेश रेशमिया का जादू अपने चरम पर था. ‘झलक दिखला जा’ उस साल सभी की जुबान पर था. ‘लागी लागी’ और ‘सोनिये’ जैसे गानों ने चार्ट्स पर राज किया. म्यूजिक ने फिल्म की सफलता में 50% योगदान दिया. रहस्यमयी धुनों ने फिल्म के सस्पेंस को और गहरा कर दिया. ‘अक्सर’ की सबसे बड़ी ताकत इसका एंडिंग है. फिल्म के बीच तक आपको लगता है कि आप कहानी समझ गए हैं, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी ऐसे मोड़ लेती है कि दर्शक अपनी सीटों से चिपके रह जाते हैं.

जब तक रिकी को एहसास होता है कि वह राज और शीना के खेल में सिर्फ एक मोहरा था, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. फिल्म के एंडिंग में यह पता चलता है कि सबसे बड़ा खिलाड़ी वही होता है जो अपनी चालें आखिर तक छिपाकर रखता है. अगर आपने यह फिल्म अभी तक नहीं देखी है, तो इसका क्लाइमैक्स आपको चौंका देगा. आज के समय में, थ्रिलर फिल्में अक्सर प्रेडिक्टेबल हो जाती हैं, लेकिन ‘अक्सर’ की स्क्रीनप्ले बहुत मजबूत थी.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म की शूटिंग लंदन की खूबसूरत जगहों पर हुई थी, जो फिल्म को एक ‘इंटरनेशनल थ्रिलर’ का एहसास देती है. फिल्म दिखाती है कि पैसा और लालच किसी भी पवित्र रिश्ते की नींव को कैसे हिला सकते हैं. डीनो मोरिया का एक लाचार पति से चालाक मास्टरमाइंड बनने का ट्रांसफॉर्मेशन उनके करियर की सबसे अच्छी परफॉर्मेंस में से एक है.

यह फिल्म ‘जहर’ के बाद इमरान और उदिता की जोड़ी की सफलता को दोहराने की एक कोशिश थी. हिमेश रेशमिया ने इस फिल्म के लिए अपने करियर के कुछ बेहतरीन सूफी-पॉप गाने कंपोज किए थे. फिल्म के ‘बोल्ड’ सीन उस समय काफी चर्चा में थे, लेकिन फिल्म देखने के बाद दर्शकों को एहसास हुआ कि इसका सस्पेंस इसके रोमांस से कहीं ज्यादा दिलचस्प था.

आज 3 फरवरी 2026 को जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो ‘अक्सर’ हमें बॉलीवुड के उस दौर की याद दिलाती है जब फिल्में कम बजट में भी अपने कंटेंट के दम पर बहुत बड़ा असर डालती थीं. अगर आप ऐसी फिल्म ढूंढ रहे हैं जो आपको आखिर तक बांधे रखे और जिसके क्लाइमैक्स का आप बेसब्री से इंतजार करें तो आज ही ‘अक्सर’ को अपनी वॉचलिस्ट में शामिल करें.
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